ब्रह्मांड में सुपर ब्लास्ट: वैज्ञानिक हैरान, ग्रहों का वातावरण तक नष्ट हो सकता है

पहली बार, वैज्ञानिकों ने एक निकटवर्ती तारे से निकलने वाले charged particles के एक विशाल explosion को सीधे देखा है। यह event इतनी शक्तिशाली थी कि यह अपने रास्ते में आने वाले किसी भी ग्रह के atmosphere को पूरी तरह मिटा सकती थी। इस खोज को कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है, जो तारे के ऊपरी atmosphere से तेज़ी से प्लाज़्मा के बाहर निकलने की घटना है।

इस discovery को यूरोपियन स्पेस एजेंसी के दो उपकरणों — XMM-न्यूटन स्पेस ऑब्जर्वेटरी और LOFAR रेडियो टेलिस्कोप — के ज़रिए दर्ज किया गया था। अध्ययन के निष्कर्ष journal NATURE में प्रकाशित हुए हैं, जो इसकी scientific विश्वसनीयता को बढ़ाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे स्पेस weather की समझ यह तय करने में मददगार है कि कौन से ग्रह जीवन के लिए suitable हो सकते हैं।

नीदरलैंड के खगोलविद् हेनरिक एकलंड ने कहा कि यह नई जानकारी research के क्षेत्र में एक बड़ा breakthrough है। इससे पहले, CME केवल हमारे सूरज पर ही देखे गए थे। अब यह साबित हुआ है कि छोटे तारे भी हमारे सूरज से कहीं more powerful धमाके पैदा कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह विशिष्ट CME लगभग 2400 किमी प्रति सेकंड की speed से आगे बढ़ रहा था, जो हमारे सूरज से आने वाले CME की गति का महज़ 5% है। इसका अर्थ यह है कि ऐसे violent तारकीय events अपने आसपास के ग्रहों को लगातार radiation से घेर सकते हैं, जिससे वहाँ जीवन का विकास nearly impossible हो जाता है।

टिप्पणियाँ 6

  • तारामंथन

    इतनी तेज गति से निकलने वाला plasma किसी ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र को भी तोड़ सकता है। यह सचमुच डरावना है।

  • अंतरिक्षयात्री

    हमारा सूरज भी CME पैदा करता है, लेकिन इतना शक्तिशाली नहीं। क्या यह हमारे solar system के लिए भी खतरा हो सकता है?

  • ज्ञानचक्षु

    छोटे तारे इतने खतरनाक हो सकते हैं? मैं हमेशा सोचता था कि बड़े तारे ही सबसे ज़्यादा dangerous होते हैं।

  • चंद्रप्रभा

    अगर ये explosions इतने तेज़ हैं, तो क्या कोई ग्रह इनके बीच जीवन बचा भी पाएगा? लगता है जीवन ब्रह्मांड में और भी rare है।

  • खगोलरस

    LOFAR और XMM-न्यूटन ने एक बार फिर अद्भुत observation किया है। यह दिखाता है कि technology के बिना विज्ञान अधूरा है।

  • विज्ञानप्रेमी

    क्या ये charged particles पृथ्वी तक पहुँच सकते हैं? अगर हाँ, तो क्या ये हमारे communication नेटवर्क को प्रभावित कर सकते हैं?