उल्कापिंड गड्ढा नहीं, लाखों साल पुरानी भूवैज्ञानिक गुंबद, नासा ने कैद की 'सहारा की आंख' की छवि

सहारा रेगिस्तान के बीच एक रहस्यमयी गोलाकार संरचना लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बनी हुई थी। कई दशकों तक इसे किसी impact crater माना जाता रहा, लेकिन अब नासा के नए उपग्रह चित्रों ने इसका सच सामने ला दिया है। यह वास्तव में लाखों साल पुरानी एक geological dome है, जिसे 'रिचैट स्ट्रक्चर' या 'सहारा की आंख' के नाम से जाना जाता है।

नासा के लैंडसैट 8 और 9 उपग्रहों ने मार्च 2026 में इस संरचना की उच्च-स्पष्टता वाली तस्वीरें ली हैं। यह संरचना उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के मॉरिटानिया में स्थित है और इसका व्यास लगभग 40 किलोमीटर है। ऊपर से देखने पर यह एक विशाल बैल की आंख या बटनहोल जैसी दिखाई देती है। इसके आसपास के रंग-बिरंगे रेत के टीले, गहरी घाटियां और सूखी नदी धाराएं इस छवि को और भी दृष्टिकर्षक बनाते हैं। यह पृथ्वी की सतह को आकार देने वाली शक्तियों का एक जीवंत उदाहरण है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह संरचना जमीन के नीचे से आग्नेय पदार्थ के ऊपर उठने से बनी है। इससे चट्टानी परतें ऊपर की ओर धकेली गईं और एक dome जैसा आकार बन गया। समय के साथ erosion ने इन परतों को अलग-अलग दर पर घिसा, जिससे केंद्र से बाहर की ओर फैली संकेंद्रित लकीरें बनीं। इन्हें ‘क्यूस्टा’ कहा जाता है। इन रंगों के आधार पर वैज्ञानिक विभिन्न प्रकार की चट्टानों की पहचान कर सकते हैं।

इस संरचना को पहली बार 1930 के दशक में फ्रांसीसी भूगोलवेत्ताओं ने 'रिचैट बटनहोल' नाम दिया था। 1965 में नासा के एस्ट्रोनॉट्स एड व्हाइट और जेम्स मैकडिविट ने जेमिनी IV मिशन के दौरान इसकी तस्वीरें खींचीं, जिसके बाद यह 'सहारा की आंख' के नाम से मशहूर हुई। जमीन से यह आकृति स्पष्ट नहीं दिखती, लेकिन satellite imagery में यह अद्भुत तरीके से उभरती है।

ये तस्वीरें केवल वैज्ञानिकों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। यह हमें पृथ्वी के भूवैज्ञानिक history और प्राकृतिक प्रक्रियाओं की शक्ति के बारे में बेहतर जानकारी देती हैं। यह दिखाता है कि कैसे natural forces लाखों साल में पृथ्वी के नक्शे को बदल सकती हैं — बिना किसी उल्कापिंड के टकराव के।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • राजीव_जी

    अब समझ आया कि अंतरिक्ष से satellite क्यों इतना जरूरी है। जमीन से तो यह संरचना दिखती भी नहीं, लेकिन ऊपर से यह कितनी स्पष्ट है।

  • मीरा_कश्यप

    हमेशा सोचती थी कि यह कोई उल्कापिंड का निशान है। पता नहीं था कि यह तो natural process का नतीजा है। विज्ञान हमेशा आश्चर्यचकित करता है।

  • अमित_भट्ट

    क्या इसके आसपास कोई जीवन के निशान भी हैं? geological discovery तो बहुत बढ़िया है, लेकिन क्या यहां कभी जलवायु अलग थी?

  • संजय_एम

    इस तरह की research के लिए नासा का धन्यवाद। बिना उनके उपग्रहों के हम ऐसी चीजों के बारे में कभी नहीं जान पाते।

  • लक्ष्मी_प्रसाद

    ये तस्वीरें तो बहुत सुंदर हैं, लेकिन क्या इसका कोई practical impact है? जैसे खनिजों की खोज या पानी के स्रोत?

  • विकास_टी

    1965 में एस्ट्रोनॉट्स ने तस्वीरें ली थीं और आज तक हम इसकी प्रक्रिया समझ रहे हैं — यही है science की धीमी, लेकिन गहरी यात्रा।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

[email protected]