क्या आपकी किडनी भी खतरे में है? हर दस में एक भारतीय पर खतरा
एक ऐसी बीमारी जो चुपचाप आपके शरीर में घर कर रही है — किडनी रोग। देश के हर दस में से एक व्यक्ति इसकी चपेट में है। यह संख्या सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। जब लक्षण दिखते हैं, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है। कई मरीज तभी अस्पताल जाते हैं जब उनकी किडनी की function लगभग खत्म हो चुकी होती है। इलाज महंगा, जटिल और जीवनभर का हो जाता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ कहते हैं — रोकथाम ही एकमात्र रास्ता है।
प्रो. अभिलाष चंद्रा, लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष, ने स्पष्ट किया कि अब यह सिर्फ व्यक्तिगत जीवनशैली का मुद्दा नहीं रहा। climate परिवर्तन और पर्यावरणीय कारक भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। असुरक्षित पानी, बढ़ता तापमान, pollution , और जहरीले तत्व — ये सभी किडनी के लिए जहर बन रहे हैं। गंदे पानी के जरिए शरीर में घुसे infection और विषाक्त पदार्थ धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं।
प्रो. सीएम सिंह ने बताया कि वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण, जैसे पीएम 2.5, रक्त में प्रवेश कर किडनी तक पहुंचते हैं। ये कण नाजुक फिल्टरिंग प्रणाली को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा, कृषि में इस्तेमाल होने वाले chemical कीटनाशक भी खतरा बन गए हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से शरीर में विषाक्तता बढ़ती है और किडनी पर pressure पड़ता है।
खासकर किसानों और कृषि कार्य से जुड़े लोगों में इसका खतरा अधिक है। लेकिन शहरी आबादी भी सुरक्षित नहीं है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, और अनियमित खानपान भी बड़े कारण हैं। painkillers दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल करना भी खतरनाक है। यहां तक कि पानी कम पीना भी damage पहुंचा सकता है। जो लोग रोजाना कम पानी पीते हैं, उनके लिए यह चेतावनी विशेष रूप से है।
इस समस्या के आगे बढ़ने से रोकना अब सामूहिक जिम्मेदारी बन चुकी है। व्यक्ति से लेकर समाज और सरकार तक — सभी को जागरूक होना होगा। early लक्षणों को पहचानना, regular जांच करवाना, और जीवनशैली में बदलाव लाना अब जरूरी है। स्वच्छ पानी, स्वच्छ हवा, और स्वस्थ आहार — यही उपाय है। क्योंकि किडनी एक बार खराब हो जाए, तो recovery मुश्किल होता है।
हमारे गांव में भी कई किसानों को किडनी की समस्या है। लगातार कीटनाशकों के संपर्क में रहने से यह risk खतरा बढ़ रहा है।
मैं तो हर घंटे पानी पीती हूं। इतना पानी कम पीने का असर इतना बुरा हो सकता है, यह जानकर डर लग रहा है।
अक्सर लोग दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के medication दवा ले लेते हैं। यही छोटी आदत बड़ी मुसीबत बन जाती है।
प्रदूषण और किडनी रोग का सीधा संबंध है। सरकार को environment पर्यावरण सुरक्षा पर गंभीरता से काम करना चाहिए।
गांवों में शुद्ध पानी की सुविधा कम है। असुरक्षित पानी पीना तो आम बात है।
मैंने अब तक कोई लक्षण नहीं महसूस किया, लेकिन फिर भी अब मासिक जांच करवाने का प्लान बना रही हूं। रोकथाम बेहतर है।
पहले लोग बूढ़े होने पर बीमार पड़ते थे, अब जवानी में ही किडनी खराब हो रही है। जीवनशैली बदल गई है।
इस विषय पर स्कूलों में भी जागरूकता अभियान चलना चाहिए। बच्चों को स्वस्थ आदतें जल्दी सिखानी चाहिए।