वजन बढ़ने के कारण और बचाव: 20-40 की उम्र में तेजी से बढ़ता मोटापा, जानिए जोखिम और उपाय
मोटापा अब केवल age की समस्या नहीं रह गया है। 20-40 के बीच के युवा भी तेजी से वजन बढ़ने की समस्या से जूझ रहे हैं। पहले यह health risk 45-50 की उम्र के बाद दिखता था, लेकिन अब दिल्ली से लेकर छोटे शहरों तक में 30 की उम्र से ही पेट निकलना, थकान और वजन बढ़ना आम हो गया है। डेस्क जॉब, मोबाइल स्क्रीन और तले-भुने खाने के आदी होने ने एक ऐसी lifestyle बना दी है जहां शरीर movement की बजाय बैठने का आदी हो गया है।
फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग के बैरियाट्रिक सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. पंकज शर्मा कहते हैं कि आज के युवा दिनभर काम में ‘smart ’ होते हैं, लेकिन physical activity में बहुत ‘slow ’ पड़ गए हैं। देर रात तक जागना, stress में खाना, सॉफ्ट ड्रिंक और वीकेंड पार्टी के बाद बर्गर खाना — ये सब मिलकर धीरे-धीरे weight gain का कारण बन रहे हैं। शुरुआत में इसका असर नहीं दिखता, लेकिन 28-30 की उम्र में सीढ़ियां चढ़ने पर breathlessness और कमर का नाप बढ़ना शुरू हो जाता है।
मोटापा सिर्फ appearance की बात नहीं — यह एक चयापचय रोग है। शरीर में जमा fat , खासकर पेट के आसपास की ‘विसरल चर्बी’, हार्मोन्स को बिगाड़ देती है। यह इंसुलिन के काम करने के तरीके को बदल देती है और diabetes की ओर ले जाती है। पुरुषों में कमर का नाप 90 सेमी और महिलाओं में 80 सेमी से ज्यादा होना एक warning sign है।
मोटापे से बचाव के लिए जिम जाना जरूरी नहीं, बल्कि पूरी lifestyle बदलनी होगी। रोजाना कम से कम 8-10 हजार कदम चलना, रात 12 बजे से पहले सोना, प्रोसेस्ड खाना और मीठे पेय पदार्थों से परहेज, और हर घंटे में 5 मिनट उठकर चलना — ये छोटे कदम बड़ा impact डाल सकते हैं। प्लेट के आधे हिस्से में सलाद और protein रखना भी मददगार है।
अगर बीएमआई 35 से अधिक हो और डायबिटीज या उच्च रक्तचाप भी हो, तो डॉक्टर की सलाह से बैरियाट्रिक सर्जरी एक विकल्प हो सकती है। आज इसे सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। लेकिन यह आखिरी विकल्प है। युवाओं को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना अब शौक नहीं, बल्कि necessity बन गया है। 25 की उम्र में कमाई बढ़ सकती है, लेकिन अगर health नष्ट हो गया, तो 40 की उम्र में दवाइयों के सहारे जीवन बिताना पड़ सकता है।
हर दिन ऑफिस में 10 घंटे बैठने के बाद जिम जाने का time समय कहां मिलता है? छोटे-छोटे changes बदलाव ही काम आएंगे।
मैंने 3 महीने पहले मीठी चाय और कोल्ड ड्रिंक छोड़े। वजन तो नहीं घटा, लेकिन energy level ऊर्जा का स्तर बहुत बेहतर हुआ।
कई बार medical condition चिकित्सकीय स्थिति जैसे थायरॉइड भी वजन बढ़ने का कारण बनती है। सिर्फ lifestyle जीवनशैली पर दोष न डालें।
हमारे यहां तो फूड ऐप्स ने सब बिगाड़ दिया। पहले घर का बना खाना, अब रात 11 बजे भी पिज्जा ऑर्डर। convenience सुविधा ने health स्वास्थ्य को हरा दिया।
क्या बैरियाट्रिक सर्जरी वाकई सुरक्षित है? कोई लंबे समय तक के side effects दुष्प्रभाव तो नहीं?
पहले लोग कहते थे ‘गोल-मटोल अच्छा लगता है’, अब social pressure सामाजिक दबाव इतना बढ़ गया कि पतला होना जरूरी लगता है।