RRP सेमीकंडक्टर का शेयर: 15 से 10,887 तक की उछाल, अब SEBI की जांच में सामने आया बड़ा मैनिपुलेशन
जिस शेयर को देखकर investors ने सोचा था कि उनकी fortune खुल गई, वही अब उनके लिए fear का सबब बन गया है। RRP सेमीकंडक्टर के stock ने अप्रैल 2024 में महज ₹15 के price से शुरुआत की और अक्टूबर 2025 तक ₹10,887 के स्तर को छू लिया, यानी 19 महीनों में लगभग 725 गुना का return । इस तेजी ने retail निवेशकों में एक frenzy सी मचा दी, जिसमें बहुतों ने इसे अगला multibagger मानकर निवेश किया।
लेकिन अब SEBI ने इस तेजी के behind छिपे manipulation का पर्दाफाश किया है। नियामक ने पाया कि बढ़ती कीमतों के पीछे कंपनी का मजबूत business नहीं, बल्कि 39 एंटिटी का एक जाल था, जो आपस में coordinated trading , ऑफ-मार्केट डील्स और fund transfer के जरिए जुड़ी थी। इन्होंने मिलकर शेयर की कीमत को artificially ऊपर धकेला।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब शेयर skyrocketing रहा था, तब कंपनी का operational revenue लगभग शून्य पर पहुंच चुका था। आमदनी गिर रही थी, profit टूट रहा था, लेकिन price चढ़ती रही। SEBI ने पाया कि कुछ select buyers लगातार अपर सर्किट पर खरीदारी कर रहे थे, ताकि बाजार में demand का भ्रम पैदा किया जा सके।
इस market के जाल में फंसे निवेशकों के लिए अब सबसे बड़ा risk यह है कि स्टॉक में भारी गिरावट आ सकती है। SEBI ने 39 एंटिटी के demat accounts फ्रीज कर दिए हैं और करीब ₹2 करोड़ की illegal gains जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। ऐसे मामलों में अक्सर liquidity crisis आता है और निवेशक unable हो जाते हैं अपने शेयर बेचने में।
यह मामला सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं, बल्कि उस सफेदपोश अपराध का उदाहरण है जो बिना शोर के बाजार को झकझोरता है। आम निवेशक को याद रखना चाहिए कि अगर कोई शेयर बिना fundamentals के रॉकेट की तरह ऊपर जा रहा है, तो वह opportunity नहीं, बल्कि trap भी हो सकता है। असली value बिजनेस में होती है, न कि सिर्फ price में।
अगर fundamentals बिजनेस के मूल कमजोर हैं, तो चाहे शेयर कितना भी ऊपर क्यों न जा रहा हो, वो गिरेगा ही। ये सब hype उत्तेजना थी, असली growth विकास नहीं।
मैंने इस शेयर को ₹8,000 पर खरीद लिया था... अब panic घबराहट हो रही है। क्या मेरा पैसा trapped फंस जाएगा? कोई liquidity तरलता होगी भी या नहीं?
SEBI की कार्रवाई तो अच्छी है, लेकिन delayed देरी से आई। जब तक कार्रवाई होती है, आम investor निवेशक का पैसा डूब चुका होता है।
क्या ये सच में manipulation हेराफेरी थी, या सिर्फ एक अजीब market cycle बाजार चक्र? कुछ शेयर बिना वजह चढ़ जाते हैं, बिना वजह गिर जाते हैं।
39 एंटिटी पर बैन... ये तो सिर्फ आइसबर्ग की नोक है। पीछे और भी बहुत कुछ होगा जो अभी छिपा है।
अगर कंपनी का revenue राजस्व शून्य के करीब था और फिर भी शेयर चढ़ रहा था, तो ये red flag लाल झंडा था। निवेशकों को warning चेतावनी क्यों नहीं मिली?