Jaypee Associates मामले में नया मोड़, Vedanta पर Bid जानकारी लीक करने का गंभीर आरोप
जयप्रकाश एसोसिएट्स के bankruptcy resolution मामले में एक नया मोड़ आया है, जहाँ कर्जदाताओं की समिति ने वेदांता पर bid information लीक होने का गंभीर आरोप लगाया है। इस आरोप के अनुसार, वेदांता ने बोली की अंतिम समय सीमा के बाद अपना प्रस्ताव revised किया, जिसे नियमों के तहत मान्यता नहीं दी जानी चाहिए थी। इससे नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में चल रही सुनवाई में तेजी आई है और पचास हजार करोड़ रुपये के इस समाधान पर अनिश्चितता बढ़ गई है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ट्रिब्यूनल के समक्ष कहा कि वेदांता शुरुआत में lower ranked पर थी, लेकिन अचानक उसने अपनी बोली में सुधार किया, जिससे यह संदेह पैदा हुआ कि उसे समय सीमा के बाद गुप्त जानकारी मिली होगी। एक प्रमुख सदस्य ने चेतावनी दी कि यदि इस संशोधित प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया, तो पूरी bidding process फिर से शुरू करनी पड़ सकती है, जिससे समाधान में बड़ी delay होगी।
वहीं, वेदांता ने इन आरोपों को denied कर दिया है और कहा है कि उसने सभी दस्तावेज ट्रिब्यूनल में पेश किए हैं तथा किसी भी जानकारी को छुपाया नहीं गया है। इसके बजाय, कंपनी ने खुद आरोप लगाया है कि बोली प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और उसके प्रस्ताव को नजरअंदाज किया गया। इसलिए उसने अदानी एंटरप्राइजेज की जीत को challenged दी है, जिसे 17 मार्च को इलाहाबाद पीठ द्वारा मंजूरी दी गई थी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जानकारी लीक होने का आरोप सिद्ध होता है, तो वेदांता के पक्ष में equal opportunity का मुद्दा उठ सकता है, जो उसकी स्थिति को मजबूत कर सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, लेकिन यह निर्देश दिया कि किसी भी आगे की major action से पहले अपीलीय न्यायाधिकरण की अनुमति ली जाए।
जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड पर 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और इसकी संपत्तियों में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में 4000 एकड़ जमीन, होटल, सीमेंट संयंत्र और फॉर्मूला रेसिंग ट्रैक शामिल हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होनी है, जहाँ बाजार के निवेशकों की नजर market impact और निष्पक्षता के मुद्दों पर टिकी होगी।
अगर वेदांता ने वास्तव में समय के बाद बोली संशोधित की, तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन है। fair play निष्पक्ष खेल के सिद्धांत पर सवाल उठता है।
सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप न करके सही किया, लेकिन अब अपीलीय न्यायाधिकरण को swift decision त्वरित निर्णय लेना होगा, नहीं तो निवेशक आतंकित होंगे।
पारदर्शिता की कमी का आरोप गंभीर है। अगर यह साबित होता है, तो भारत के investment climate निवेश जलवायु पर भी असर पड़ेगा।
नोएडा की 4000 एकड़ जमीन के मामले में इतनी तीखी प्रतिस्पर्धा समझ में आती है। यहाँ की अचल संपत्ति की कीमत अब और बढ़ेगी।
क्या वाकई जानकारी लीक हुई या वेदांता को बस second chance दूसरा मौका चाहिए था? इस आरोप का इस्तेमाल देरी की रणनीति के तौर पर तो नहीं किया जा रहा?
अगली सुनवाई महत्वपूर्ण है। क्या ट्रिब्यूनल इस legal challenge कानूनी चुनौती को गंभीरता से लेगा या त्वरित निपटान करेगा?