US Defense Budget: ईरान युद्ध से प्रभावित ट्रंप कैसे बढ़ाएंगे अमेरिका की ताकत? सेना को मिलेंगे ढेरों 'ब्रह्मास्त्र'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वित्त वर्ष 2027 के लिए defense budget को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसके तहत, अमेरिका का रक्षा बजट बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर किया जाएगा। यह राशि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक military spending वृद्धि है। पेंटागन के अधिकारियों ने मंगलवार को यह घोषणा की, जिसमें बताया गया कि यह बजट अमेरिकी सेना की ताकत को नए सिरे से तैयार करने पर केंद्रित है।
इस बजट में पांच मुख्य क्षेत्रों पर focus किया गया है, जिन्हें पेंटागन ने राष्ट्रपति की प्राथमिकताएं कहा है। इनमें missile defense प्रणाली 'गोल्डन डोम', artificial intelligence , डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, ड्रोन तकनीक और रक्षा उद्योग का विस्तार शामिल है। यह बदलाव स्पष्ट करता है कि अमेरिका अब आधुनिक युद्ध के नए युग के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
नौसेना की ताकत को बढ़ाने के लिए बजट में 18 युद्धपोत और 16 सहायक जहाज खरीदने का प्रावधान है, जिस पर 65 अरब डॉलर खर्च होंगे। यह shipbuilding के लिए 1962 के बाद अब तक का सबसे बड़ा प्रस्ताव है और पेंटागन की गोल्डन फ्लीट पहल का हिस्सा है। साथ ही, वायुसेना के लिए हर साल 85 F-35 लड़ाकू विमान खरीदे जाएंगे, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक बड़ी छलांग है।
इसके अलावा, अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों जैसे बोइंग के F-47 और नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन के B-21 बॉम्बर के लिए भी बजट का प्रावधान किया गया है। autonomous drones और युद्धक्षेत्र लॉजिस्टिक्स पर 53.6 बिलियन डॉलर की मांग की गई है, जो सैन्य logistics में बड़े निवेश को दर्शाता है।
हालांकि, बजट में ईरान के साथ चल रहे conflict के लिए कोई अलग धनराशि नहीं रखी गई है। पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस तरह के निकटकालीन operational costs को पूरा करने के लिए बाद में एक अतिरिक्त बजट अनुरोध की आवश्यकता पड़ सकती है। यह घोषणा दर्शाती है कि अमेरिका एक लंबे समय तक चलने वाली सैन्य तैयारी की रणनीति पर आधारित है, न कि केवल वर्तमान संकट पर।
1.5 ट्रिलियन डॉलर? यह रकम तो कई विकासशील देशों के सकल घरेलू उत्पाद से भी ज्यादा है। global inequality वैश्विक असमानता यहां साफ झलकती है।
क्या इतना बड़ा military buildup सैन्य निर्माण वास्तव में दुनिया को सुरक्षित बनाएगा या सिर्फ तनाव बढ़ाएगा? यह सवाल बना हुआ है।
F-35 और B-21 बॉम्बर पर इतना ध्यान... लेकिन क्या cyber warfare साइबर युद्ध के खतरों के लिए भी उतना बजट आवंटित किया गया है?
ईरान के साथ संघर्ष के लिए अलग से फंड नहीं? यह अजीब है। शायद वे राजनीतिक छवि को ध्यान में रख रहे हैं।
गोल्डन फ्लीट पहल... नाम तो बहुत शानदार है। लेकिन क्या वाकई इतने जहाजों की जरूरत है? naval power नौसैनिक शक्ति का यह दिखावा है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ड्रोन पर बढ़ता ध्यान दिलचस्प है। यह दिखाता है कि भविष्य के युद्ध autonomous weapons स्वचालित हथियारों पर आधारित होंगे।
पिछले साल 1 ट्रिलियन डॉलर था, अब 1.5 ट्रिलियन... कहां तक बढ़ेगा यह defense spending रक्षा खर्च? कोई सीमा होनी चाहिए।