अभी नहीं मिलेंगे हथियार, तनातनी के बीच अमेरिका ने यूरोप से क्यों कहा ऐसा?
अमेरिका ने यूरोपीय देशों के लिए अपने arms supply में देरी का संकेत देकर अंतरराष्ट्रीय tensions को और बढ़ा दिया है। ये हथियार विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम (FMS) के तहत पहले ही खरीदे जा चुके थे, लेकिन deliveries अभी लंबित है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण military stock तेजी से कम हो रहा है, इसलिए यूरोप को उनके pre-ordered weapons अभी नहीं दिए जा सकते।
इस decision ने पश्चिमी गठबंधन के बीच दरार को उजागर कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूरोपीय देशों पर नाराज हैं क्योंकि वे ईरान युद्ध में अमेरिका के साथ military support नहीं दे रहे। कई यूरोपीय देशों ने स्पष्ट किया है कि वे इस संघर्ष में neutrality बरतेंगे। ट्रंप प्रशासन के लिए यह राजनयिक अलगाव एक बड़ी चुनौती है।
अमेरिका की ओर से कहा गया है कि मध्य पूर्व में चल रहे ऑपरेशन के लिए critical resources जरूरी हैं। विशेष रूप से, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रखने में यूरोप की अनुपस्थिति ने अमेरिका पर अतिरिक्त strategic pressure डाला है। अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि यूरोप की ओर से सहायता न मिलने से अमेरिका को सब कुछ अकेले संभालना पड़ रहा है।
वास्तव में, अमेरिका में हथियारों की कमी पहले से ही एक growing concern थी। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध और 2023 में गाजा के ऑपरेशन के दौरान अरबों डॉलर के ammunition और मिसाइलें खर्च की जा चुकी हैं। अब ईरान ने हजारों बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से खाड़ी क्षेत्र पर sustained attacks किए हैं, जिससे defense systems पर भारी दबाव पड़ा है।
इस संदर्भ में, ट्रंप की नीति यूरोप पर अमेरिकी arms dependence बढ़ाने पर केंद्रित है। उनका तर्क है कि यूरोप को अपनी सुरक्षा की full responsibility लेनी चाहिए, लेकिन वे खुद उन्हें अमेरिकी हथियार खरीदने के लिए economic pressure डाल रहे हैं। यह विरोधाभास नाटो के गठबंधन विश्वास को भी झटका दे रहा है।
अगर अमेरिका खुद निर्भरता बढ़ा रहा है, तो फिर यूरोप को दोष क्यों दे रहा है? ये economic pressure आर्थिक दबाव तो साफ नजर आ रहा है।
मध्य पूर्व में हर बार अमेरिका युद्ध शुरू करता है, और फिर सबको military support सैन्य समर्थन देने के लिए कहता है। क्या यह fair न्यायसंगत है?
हथियारों के भंडार का कम होना गंभीर बात है। लेकिन क्या यह वाकई यूरोप की गलती है?
ट्रंप बार-बार नाटो को लेकर धमकी देते हैं। क्या अब alliance गठबंधन टूटने वाला है?
यूरोप को अपनी defense systems रक्षा प्रणालियाँ खुद बनानी चाहिए। अमेरिका पर इतना dependence निर्भर रहना खतरनाक है।
क्या ये सिर्फ delay देरी है या असल में हथियारों का इस्तेमाल दबाव डालने के लिए किया जा रहा है?