दिल्ली में 26/11 दोहराने की साजिश कर रहे थे शहजाद भट्टी के गुर्गे, नामी होटल पर हमले की थी योजना
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी terrorism साजिश का भंडाफोड़ किया है। आईएसआई के संरक्षण में काम कर रहे पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के दो gangsters को गिरफ्तार किया गया है। दोनों विदेशी handlers के संपर्क में थे और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए निर्देश ले रहे थे। एक आरोपी दिल्ली के एक नामी होटल पर हमला करने की plan में था, जिसका उद्देश्य मुंबई में 26/11 के हमले की तर्ज पर एक बड़ी घटना को दोहराना था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 21 वर्षीय राजवीर और 19 वर्षीय विवेक बंजारा उर्फ वनजारा के रूप में हुई है। दोनों मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हैं। पुलिस ने उनके पास से एक पिस्तौल और छह जिंदा कारतूस बरामद किए। यह भी पता चला कि उन्होंने पंजाब के जीरकपुर स्थित एक प्रसिद्ध क्लब पर हमला करने का attempt किया था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण पिस्तौल नहीं चल पाई।
जांच से पता चला कि शहजाद भट्टी ने भारी मात्रा में हथियार और पैसा मुहैया कराया था। मार्च 2026 में विवेक को अहमदाबाद भेजा गया था हथियार लेने के लिए, लेकिन डील असफल रही। 9 अप्रैल को अमृतसर में उन्होंने एक पिस्तौल, लगभग 20 कारतूस और 20,000 रुपये प्राप्त किए। राजवीर को दिल्ली में हमले की target के तौर पर तैयार किया गया था, लेकिन 18 अप्रैल को सराय काले खां इलाके में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को भर्ती करने में भट्टी माहिर है। राजवीर को पहले एक व्यक्ति ने संपर्क किया था जो भट्टी का करीबी माना जाता है। बाद में उसने विवेक को भी शामिल किया। घटना के बाद के evidence के तौर पर विवेक ने वीडियो बनाकर उसे पाकिस्तान भेजा था, ताकि विश्वास दिलाया जा सके कि काम किया गया है।
दिल्ली पुलिस अब इन आरोपियों के लोकल समर्थकों और वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स की जांच जारी है जिनके माध्यम से पैसा भेजा जा रहा था। अधिकारियों को आशंका है कि इस गिरफ्तारी से देश में मौजूद अन्य sleeper cells का भी खुलासा हो सकता है। शहजाद भट्टी भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल है और अब एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन चुका है।
इस तरह के threat खतरे हमेशा बने रहते हैं। बस पुलिस की नजर तेज होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों के खिलाफ action कार्रवाई क्यों नहीं होती? बेरोजगार युवा आसानी से फंस जाते हैं।
26/11 की तरह हमले की साजिश? सच में दिल दहल गया। ये लोग कभी नहीं बदलेंगे।
एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए निर्देश मिल रहे थे। तकनीक का दुरुपयोग हो रहा है। digital security डिजिटल सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है।
क्या वाकई दिल्ली में नामी होटल को target टारगेट किया जा रहा था? अगर नहीं पकड़े जाते तो क्या होता?
दुबई में रहकर आतंक का नेटवर्क चलाना… ये भट्टी किसके संरक्षण में है? international support अंतर्राष्ट्रीय समर्थन की बात साफ है।
वीडियो भेजकर proof प्रूफ देना… ये सब बहुत आयोजित था। बहुत खतरनाक।
20 हजार रुपये और एक पिस्तौल? इतने कम पैसे में इतनी बड़ी साजिश? cost लागत तो बहुत कम है, लेकिन नुकसान भारी हो सकता था।