होर्मुज में ईरान का टोल का दावा: क्यों तुर्की-मिस्र वसूल सकते हैं, लेकिन ईरान नहीं?
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के new demand ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और maritime law के तहत नाविक अधिकारों पर गहरा impact डाला है। अमेरिका-ईरान के बीच तल्खी के बीच, तेहरान ने सुझाव दिया है कि वह transit passage से गुजरने वाले तेल के जहाजों से प्रति बैरल 1 डॉलर का toll वसूल सकता है। यह मांग अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ जा रही है, जो प्राकृतिक जलडमरूमध्यों में free navigation की गारंटी देता है।
लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर तुर्की, पनामा या मिस्र अपने क्षेत्रों में टोल वसूल सकते हैं, तो ईरान क्यों नहीं? जवाब छिपा है legal distinction में। स्वेज और पनामा नहरें man-made हैं और इन्हें उन देशों के internal waters के रूप में मान्यता मिली है, जिसके तहत वे अपनी मर्जी से शुल्क लगा सकते हैं। इसके विपरीत, होर्मुज एक प्राकृतिक strait है, जहां transit passage लागू होता है।
1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के तहत, ऐसे जलडमरूमध्यों में कोई तटीय देश direct toll नहीं ले सकता। वे केवल limited services —जैसे पायलट सहायता, टग बोट या बचाव कार्य—के लिए शुल्क वसूल सकते हैं। तुर्की भी बोस्फोरस जलमार्ग पर इसी तर्क के आधार पर शुल्क लेता है, लेकिन वह केवल सुरक्षा और बचाव सेवाओं के नाम पर है, न कि गुजरने के बदले।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर अमेरिका, ईरान की इस proposal का सख्ती से opposes कर रहा है। होर्मुज से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुजरती है, इसलिए कोई भी disruption वैश्विक energy prices में उछाल का कारण बन सकता है। खाड़ी देशों जैसे यूएई और कतर ने स्पष्ट किया है कि यह मार्ग shared resource है और इसे किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं दिया जाना चाहिए।
इस तनाव ने यह भी उजागर किया है कि भू-राजनीति अक्सर international norms को चुनौती देती है। ईरान का दावा न्यायिक रूप से कमजोर है, लेकिन यह एक strategic card के तौर पर खेला जा रहा है। अगर ऐसी मांगें स्वीकार हो जाएं, तो मलक्का या जिब्राल्टर जैसे अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर भी भविष्य में similar claims उठ सकते हैं, जो वैश्विक व्यापार के लिए खतरा बन सकते हैं।
अगर ईरान ने वाकई होर्मुज पर टोल लगा दिया, तो तेल के जहाजों का transit cost पारगमन लागत बढ़ेगा, और वो लागत आखिरकार हम जैसे उपभोक्ताओं पर आ गिरेगी।
तुर्की को मॉन्ट्रो समझौते के तहत limited right सीमित अधिकार मिला है, लेकिन ईरान के पास ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं है। ये फर्क समझना जरूरी है।
हमारे देश को भी इसका direct impact सीधा प्रभाव महसूस होगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतें spike उछल सकती हैं, खासकर अगर अमेरिका नाकेबंदी कर दे।
होर्मुज नहर नहीं है, बल्कि प्राकृतिक जलडमरूमध्य है। इसलिए ईरान का टोल लगाने का दावा बिल्कुल baseless निराधार है।
अगर एक देश ऐसा कर सकता है, तो फिर इंडोनेशिया मलक्का से भी टोल मांग सकता है। क्या यही new precedent नया उदाहरण स्थापित हो रहा है?
कानून कुछ भी कहे, लेकिन अगर ईरान ने जहाजों को रोक दिया, तो military response सैन्य प्रतिक्रिया तो होगी ही। ये सिर्फ टोल की बात नहीं, बल्कि power play शक्ति का खेल है।