सन फार्मा का 1.17 लाख करोड़ का विदेशी सौदा: क्या यह बनेगा इतिहास?
भारतीय pharma जगत में एक ऐतिहासिक deal लगभग पक्का हो चुका है। सन फार्मा, जो पहले से ही देश की सबसे valuable दवा निर्माता कंपनी है, अब अमेरिका की ऑर्गेनॉन एंड कंपनी को 12.5 अरब डॉलर में खरीदने जा रही है। यह राशि 1.17 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। इस अधिग्रहण से न सिर्फ सन फार्मा का वैश्विक दायरा बढ़ेगा, बल्कि यह टाटा-कोरस के बाद किसी भारतीय कंपनी की ओर से किया गया सबसे बड़ा foreign सौदा भी होगा।
इस सौदे में सन फार्मा केवल 4.5 अरब डॉलर इक्विटी के लिए देगी, लेकिन ऑर्गेनॉन पर लगे 8.5 अरब डॉलर के debt को भी चुकाएगी। यह बोली ऑर्गेनॉन के बाजार मूल्य पर 53% का प्रीमियम है, जो इसके शेयरधारकों के लिए आकर्षक है। अमेरिका में आयोजित एक बोर्ड बैठक में स्वीडिश बायआउट ग्रुप EQT और जर्मन फार्मा कंपनी ग्रूनेंथल वाले समूह को पीछे छोड़ते हुए सन फार्मा को preferred बोलीदाता चुना गया। जेपी मॉर्गन ने इस लेन-देन में सन फार्मा की सलाहकारी की।
विश्लेषकों का मानना है कि सन फार्मा के पास मुश्किल में फंसी कंपनियों को सुधारने का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है। Ranbaxy, Taro और Caraco जैसी कंपनियों के एकीकरण के बाद इसका कामकाज और मुनाफा सुधरा था। ऑर्गेनॉन भी कर्ज के बोझ तले दबी है और इसकी growth धीमी है, लेकिन इसके उत्पाद पोर्टफोलियो में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं और बायोसिमिलर जैसे उभरते क्षेत्र शामिल हैं, जो भविष्य की संभावनाएं बताते हैं।
इस सौदे के बाद शेयर बाजार में भी हलचल हुई। ऑर्गेनॉन के शेयर में पिछले महीने 81% से अधिक की surge आई, और शुक्रवार को भी 4.84% की बढ़ोतरी हुई। दूसरी ओर, सन फार्मा के शेयर 3.57% गिर गए, जो market की चिंता को दर्शाता है कि इतनी बड़ी रकम खर्च करने का उस पर क्या impact पड़ेगा। फिर भी, कंपनी ने McKinsey & Co. जैसी परामर्शदाता फर्म को भी नियुक्त किया है, जो भविष्य की रणनीति और एकीकरण की planning तैयार कर रही है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सन फार्मा पहले से ही त्वचा रोग, आंखों की बीमारियों और ऑन्को-डर्मेटोलॉजी में मजबूत है। ऑर्गेनॉन के साथ उसे ऐसे segment में प्रवेश मिलेगा जहां मुकाबला कम है और मुनाफा ज्यादा। यह सौदा न सिर्फ एक कॉर्पोरेट सफलता है, बल्कि भारतीय industry की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा।
अगर यह debt कर्ज बोझ न बन जाए, तो यह सौदा भविष्य में बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।
क्या वाकई यह प्रीमियम इतना high ऊँचा है कि यह सही फैसला हो? बाजार तो इस पर संदेह कर रहा है।
मुझे लगता है कि यह रणनीतिक फैसला है। महिला स्वास्थ्य क्षेत्र की मांग बढ़ने वाली है।
एक भारतीय कंपनी का इतना बड़ा foreign विदेशी सौदा गर्व की बात है।
शेयर में गिरावट तो अस्थायी है, असली चुनौती एकीकरण में होगी।
बायोसिमिलर भविष्य हैं। इस क्षेत्र में निवेश बहुत smart समझदारी भरा है।
कर्ज चुकाने के बाद कंपनी की cash नकदी स्थिति क्या रहेगी? यही सवाल है।
सन फार्मा का यह कदम global वैश्विक बाजार में भारतीय उद्योग की छवि बदलेगा।