भारत ने चीन को दिया बड़ा झटका, अमेरिका के 40% स्मार्टफोन बाजार पर अब हमारा कब्ज़ा, रिपोर्ट में खुलासा
अमेरिका के smartphone market पर अब भारत का कब्जा होने की खबर ने वैश्विक trade dynamics में एक नया मोड़ डाल दिया है। मैकिन्से एंड कंपनी की एक नई report में खुलासा हुआ है कि अमेरिका अब जितने स्मार्टफोन आयात करता है, उनमें से लगभग 40 प्रतिशत माल की आपूर्ति भारत से हो रही है—एक ऐसा आंकड़ा जो चीन के लिए सीधे तौर पर major setback है। इस बदलाव ने न केवल भारत की manufacturing strength को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका कितनी strategic हो गई है।
अमेरिका पहले चीन पर अपने import dependency को लेकर चिंतित था, और अब वह अपनी आपूर्ति को विविधता दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने चीन से आने वाले लगभग 80 अरब डॉलर के सामान के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाश लिए हैं, जिनमें भारत और आसियान देशों की role सबसे प्रमुख है। भारत ने सिर्फ भौगोलिक distance को पार करने का सबूत नहीं दिया, बल्कि अपनी लागत प्रभावी production capacity और नीतिगत समर्थन के जरिए वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाई है।
स्मार्टफोन sector अब भारत के लिए एक game-changer बन गया है। एप्पल जैसी कंपनियों का भारत में उत्पादन बढ़ाना इस उछाल में एक महत्वपूर्ण कारण रहा है। इससे न केवल नौकरियों में growth हुई है, बल्कि देश के कुल निर्यात में भी एक स्पष्ट positive impact पड़ा है। यह वृद्धि विशेषज्ञों के लिए एक संकेत है कि भारत अब बस एक खपत बाजार नहीं, बल्कि एक वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में उभर रहा है।
इस बदलाव के पीछे भू-राजनीतिक factors भी महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाएं अब चीन पर कम निर्भर रहने की strategy अपना रही हैं। इसके चलते आसियान देशों ने लैपटॉप आयात में चीन की जगह ले ली है, जबकि भारत स्मार्टफोन्स में। वैश्विक supply chain में यह विविधीकरण भारत के लिए एक बड़ा opportunity बन गया है। अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो भारत न केवल चीन को चुनौती दे सकता है, बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार में एक dominant player बन सकता है।
ये 40% का आंकड़ा सिर्फ फोन तक सीमित है या अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स में भी impact प्रभाव दिखेगा?
चीन के लिए ये सच में big hit बड़ा झटका है। पहले वो सब कुछ बनाते थे, अब धीरे-धीरे उनका एकाधिकार टूट रहा है।
भारत में बने फोन अमेरिका जाएंगे, लेकिन क्या यहां के local consumers स्थानीय उपभोक्ता इनके दाम सह सकेंगे?
इससे भारत के export revenue निर्यात आय में बढ़ोतरी होगी, जो रुपये के मुकाबले डॉलर में अच्छा खबर है।
सिर्फ एप्पल ही नहीं, क्या अन्य कंपनियां भी भारत में production setup उत्पादन सुविधा बढ़ाएंगी?
भू-राजनीति के चलते ये सब हो रहा है। अगर चीन और अमेरिका सुलझ गए, तो क्या भारत को lose out हानि होगी?