703.3 अरब डॉलर: भारत के भंडार में उछाल, लेकिन क्या रुझान मजबूत है?
दुनिया के बाजारों में तनाव के बीच, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक अहम मोड़ आया है। reserves 17 अप्रैल, 2026 को समाप्त हफ्ते में बढ़कर 703.3 अरब डॉलर के स्तर पर पहुँच गए, जो पिछले हफ्ते के 2.3 अरब डॉलर के उछाल के बाद आया है। यह रुझान recovery की ओर इशारा करता है, खासकर उन अस्थिरताओं के बाद जब capital के बाहर जाने और भू-राजनीतिक तनावों ने बाजारों को हिला दिया था।
हालाँकि ये आंकड़े राहत भरे हैं, लेकिन अभी भी फरवरी के उच्चतम स्तर से कम हैं। फरवरी 2026 में भंडार 728.49 अरब डॉलर थे, जिसके बाद गिरावट आई थी। इसके बावजूद, trend सकारात्मक है: अप्रैल की शुरुआत में 9.063 अरब डॉलर की तेजी आई थी, और लगातार दो हफ्तों में वृद्धि हुई है। यह सुधार external स्थिरता की उम्मीद जगाता है।
इस सुधार में केंद्रीय बैंक की भूमिका अहम रही है। आरबीआई ने मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करके रुपये को स्थिर रखने की strategy अपनाई, डॉलर बेचकर बाजार में आपूर्ति बढ़ाई। यह हस्तक्षेप कभी-कभी भंडार में कमी लाता है, लेकिन अर्थव्यवस्था को shocks से बचाने में मदद करता है। अब, जब तनाव कम हुआ है, reserves धीरे-धीरे वसूली कर रहे हैं।
भंडार की संरचना में gold और एसडीआर जैसे घटकों में मजबूती आई है। स्वर्ण भंडार 122.13 अरब डॉलर पर पहुँच गया है, जबकि आईएमएफ के पास रिज़र्व स्थिति 48.70 अरब डॉलर और एसडीआर 18.84 अरब डॉलर हो गए हैं। ये घटक भारत के financial बफर को मजबूती दे रहे हैं, बाहरी दबाव के खिलाफ एक ताकतवर तकिया बन रहे हैं।
अंततः एक सकारात्मक trend रुझान दिख रहा है, लेकिन क्या यह स्थायी होगा?
RBI के हस्तक्षेप से भंडार कम होते हैं, फिर वे इतनी तेजी से कैसे बढ़ रहे हैं?
सोने का भंडार $100 बिलियन के ऊपर है — यह एक बड़ी achievement उपलब्धि है।
क्या यह वृद्धि विदेशी investment निवेश के कारण हुई है या केवल मूल्य उतार-चढ़ाव?
पश्चिम एशिया का तनाव शांत हो तो भारत के लिए बड़ी राहत मिलेगी।
703.3 से 728.49 तक का रास्ता अभी बाकी है। धीरे-धीरे recovery रिकवरी अच्छी लगती है।
बाहरी स्थिरता के लिए यह अहम है। डॉलर की मांग पर नियंत्रण जरूरी है।
RBI को रुपये को बचाने और भंडार बचाने के बीच संतुलन बनाना है।