एक दिन, 39,848 जांचें: कैसे नोएडा ने स्वास्थ्य को बनाया जनता का अधिकार
सुबह के नौ बजे से ही गौतमबुद्धनगर के विभिन्न कोनों में लोगों की लंबी कतारें लग गईं — कोई पुरानी बीमारी की जांच करवाने, तो कोई बच्चे के लिए टीकाकरण। यह था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयोजित mega स्वास्थ्य शिविर का दृश्य, जहां laborer के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को दरवाजे तक पहुंचाने की ऐतिहासिक कोशिश की गई। पहली बार, 29 साल बाद, शहर में ऐसा स्वास्थ्य अभियान चला, जिसमें administration , private अस्पताल, और सामाजिक संस्थाएं एक साथ आईं। हर जगह मोबाइल वैन, हेल्थ रथ, और झुग्गियों में लगे शिविर दिखे — एक संकेत कि स्वास्थ्य अब विलासिता नहीं, बल्कि अधिकार है।
216 स्थानों पर आयोजित इस शिविर में कुल checkup करने वालों की संख्या पहुंची 39,848। इनमें से 23,058 पुरुष और 16,790 महिलाएं शामिल थीं। लेकिन आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं बताते — वे एक पहल की पहुंच की कहानी कहते हैं। 137 government अस्पतालों के साथ-साथ 74 निजी अस्पतालों ने भाग लिया, जिनमें यथार्थ, मैक्स, मेदांता और फोर्टिस जैसे नाम शामिल हैं। यह सहयोग बताता है कि जब public और निजी क्षेत्र हाथ मिलाते हैं, तो सेवा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों बढ़ते हैं।
शिविर में सिर्फ दवाइयां और जांच नहीं दी गईं। यहां श्रमिकों को consultation भी मिला — विशेषज्ञों ने गंभीर बीमारियों की पहचान की, बच्चों के nutrition और शिक्षा के बारे में जानकारी दी, और उन्हें scheme का लाभ दिलाया। बैंक अधिकारियों ने खाता खोलने में मदद की, जबकि शिक्षा विभाग ने बच्चों के दाखिले की सुविधा प्रदान की। चाइल्ड पीजीआइ के विशेषज्ञों ने 225 से अधिक बच्चों की screening की — एक छोटा कदम, लेकिन लंबी उम्र के लिए बड़ा संकेत।
सामाजिक संस्थाओं का योगदान भी कम नहीं था। नेचर केयर एनजीओ ने जागरूकता के लिए नुक्कड़ नाटक किए, जहां एचआईवी जैसी घातक disease के खिलाफ संदेश दिया गया। दादी की रसोई ने श्रमिकों को नाश्ता और गमछा दिया — छोटी सी बात, लेकिन इंसानियत की बड़ी तस्वीर। नोडल अधिकारी डॉ. चंदन सोनी ने बताया कि 15 संस्थाओं ने हेल्प डेस्क लगाए। यहां तक कि 15 मोबाइल वैन ने 2,000 से अधिक लोगों की mobile जांच की। यह था स्वास्थ्य का लोकतंत्र — हर कोई, हर जगह, हर बीमारी के लिए।
अगर ऐसे camp शिविर हर साल लगें, तो गरीब आदमी के बच्चे भी डॉक्टर देखवा सकेंगे।
बच्चों के लिए टीकाकरण और डेंटिस्ट्री की सुविधा बहुत अच्छी लगी। घर पर कौन ले जाए अस्पताल?
मगर एक दिन के event आयोजन से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। नियमित स्वास्थ्य जांच चाहिए।
निजी अस्पतालों का सहयोग देखकर अच्छा लगा। उम्मीद है यह सहयोग जारी रहे।
गमछा और टोपी देने वाली बात मुझे छू गई। छोटी सी चीज, मगर इंसान को इंसान जैसा महसूस कराती है।
मुझे आश्चर्य है कि क्या इन record रिकॉर्ड को भविष्य में डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा?
मोबाइल वैन अच्छी बात है, लेकिन क्या ये हर झुग्गी में नियमित आएंगी?
एचआईवी के बारे में नुक्कड़ नाटक? बहुत बढ़िया कदम। डर के बजाय ज्ञान फैलाना जरूरी है।