नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में उत्तर प्रदेश में चलेगा अभियान, सीएम योगी खुद होंगे शामिल
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ the rights दिलाने के लिए खुद मोर्चा संभाल रहे हैं। विपक्ष द्वारा the bill को रोके जाने के विरोध में मंगलवार को लखनऊ में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसकी अगुवाई सीएम योगी करेंगे। इस रैली के बाद, the campaign की शुरुआत आधिकारिक तौर पर हो जाएगी, जिसमें पूरा मंत्रिमंडल शामिल रहेगा।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन में प्रदेशभर में public awareness अभियान चलाया जाएगा, जो ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक फैलेगा। स्वयं सहायता समूहों, महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़कर इसे एक grassroots movement का रूप दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि महिला आरक्षण को a right के रूप में प्रस्तुत किया जाए, न कि केवल एक राजनीतिक वादा।
सीएम योगी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पर सीधा attack करेंगे और उन पर injustice का आरोप लगाएंगे। वे कहेंगे कि जो दल महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में ‘आधी आबादी’ के empowerment के खिलाफ हैं। इस नारे के माध्यम से सरकार विपक्ष को जनता के बीच अलग करने की कोशिश कर रही है।
अभियान के तहत घर-घर contact भी किया जाएगा, ताकि ग्रामीण और शहरी महिलाओं तक संदेश पहुँचे। सरकार का दावा है कि यह केवल राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि एक social बदलाव की दिशा में कदम है। महिलाओं की leadership क्षमता को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है, जो अनुसूचित जाति और जनजाति की आरक्षित सीटों में भी लागू होगा। सीटों का rotation होगा, जिसका मतलब है कि हर चुनाव में आरक्षित सीटें बदल सकती हैं। यह व्यवस्था लंबे समय से लंबित representation की मांग को पूरा करने का प्रयास है।
अगर सच में महिलाओं के empowerment सशक्तीकरण की बात है, तो बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा पर भी इतना ध्यान क्यों नहीं?
यह सिर्फ एक political stunt राजनीतिक नाटक है। जब तक महिलाओं को असली ताकत नहीं मिलेगी, कोई आरक्षण बदलाव नहीं ला सकता।
विपक्ष के खिलाफ इतना जोरदार अभियान चलाने के बजाय, क्या सरकार ने इस बिल को पास करवाने के लिए वास्तविक effort प्रयास किए?
हमारे गांव में भी एक स्वयं सहायता समूह है। अगर वाकई उन्हें leadership नेतृत्व का मौका मिले, तो बहुत कुछ बदल सकता है।
आरक्षण के नाम पर आधी आबादी का injustice अन्याय करने वाले अब खुद उसी का राग अलाप रहे हैं। कितना दुखद है।
घर-घर contact संपर्क अच्छी बात है, लेकिन क्या यह सिर्फ वोट बैंक के लिए नहीं?
सीटों का rotation रोटेशन क्या सच में निष्पक्ष होगा? क्या पार्टी हाईकमान ही तय नहीं करेगा कि कहां कौन खड़ा हो?
इस अधिनियम से महिलाओं के representation प्रतिनिधित्व में बदलाव आएगा, लेकिन उनकी आवाज सुनी जाएगी या नहीं, यह देखना होगा।