गुटखा नहीं, जागरूकता: एक मैराथन जो स्वास्थ्य युद्ध बन गया
हैदराबाद की गर्म हवाओं में एक नई उम्मीद की लहर दौड़ रही थी—लेकिन यह कोई साधारण दौड़ नहीं थी। marathon के हर कदम ने जागरूकता का संदेश बिखेरा, हर सांस ने तंबाकू के खतरों को याद दिलाया। तेलंगाना के उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने रायदुर्गम के 'सत्व नॉलेज पार्क' में 10 किलोमीटर की दौड़ को flag दिखाकर एक स्वस्थ भविष्य की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी अस्पतालों को मजबूत कर रही है और निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा दे रही है। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत थी।
मंत्री ने चेतावनी दी कि gutkha , पान मसाला, खैनी और अन्य नशीले पदार्थ सिर्फ लत नहीं, बल्कि danger हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इनकी अवैध बिक्री पर ban लगाने के लिए कड़े कदम उठा रही है। युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे ऐसी हानिकारक आदतों से दूर रहें जो future को अंधेरे में धकेल सकती हैं। उन्होंने encourage किया कि योग और नियमित व्यायाम जैसी अच्छी आदतें अपनाई जाएं।
ग्लोबल ओरल कैंसर ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. के. दिलीप कुमार ने स्पष्ट किया कि मैराथन का purpose मुख कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि early से कैंसर का treatment संभव हो जाता है। उन्होंने लोगों से regular स्वास्थ्य जांच करवाने की सलाह दी। उनका मानना था कि ऐसे कार्यक्रम बीमारी की रोकथाम में important भूमिका निभाते हैं।
इस मैराथन में सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से भी प्रतिभागी आए। software कंपनियों के आईटी पेशेवरों, डॉक्टरों और जानी-मानी celebrity ने भाग लिया। साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर एम. रमेश ने 5 किलोमीटर की दौड़ को हरी झंडी दिखाई। हर कदम यह घोषणा कर रहा था कि स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जागरूकता और समुदाय की भागीदारी जरूरी है। habit से लड़ाई अब सिर्फ व्यक्तिगत चुनौती नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी बन गई है।
गुटखा वाले ठेलों पर तुरंत ban प्रतिबंध होना चाहिए। बच्चे आसानी से इसके शिकार हो रहे हैं।
मुख कैंसर की शुरुआत धीमी होती है, लेकिन early शीघ्र जांच से बचा जा सकता है।
मैराथन अच्छा आइडिया है, लेकिन क्या यह सिर्फ एक दिन का नाटक है?
सरकार को निवारक देखभाल पर ज्यादा खर्च करना चाहिए, इलाज पर नहीं।
मैं हर रविवार योग शिविर लगाता हूं। अच्छी आदतें तभी बनती हैं जब समाज साथ चले।
हमारी कंपनी ने 20 आईटी पेशेवरों को भेजा। software सॉफ्टवेयर उद्योग भी स्वास्थ्य में योगदान दे सकता है।
बचपन में पान मसाला खाना शैली लगता था, आज पता चला यह जहर है।
मेरे बेटे के स्कूल के बाहर गुटखा बेचा जाता है। कोई action कार्रवाई कब होगी?