खुल गया होर्मुज... खबर आते ही सबकुछ बदल गया, भारत के लिए 3 अच्छी खबरें
ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी से जारी tension ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में बाधा डाली थी। अमेरिका के भी इस conflict में शामिल होने के बाद स्थिति और भयावह हो गई। तब से दुनिया की निगाहें होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी थीं, क्योंकि वैश्विक स्तर पर लगभग 20 फीसदी तेल और गैस की आपूर्ति यहीं से होती है। भारत के लिए यह मार्ग खासतौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि अपनी जरूरत का अधिकांश तेल और गैस भारत मध्य-पूर्व के देशों—विशेषकर सऊदी अरब, यूएई और कुवैत—से आयात करता है, जो सब होर्मुज से गुजरता है।
अब जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने announcement की है कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है, तो वैश्विक बाजारों में तेजी से prices में गिरावट आई है। कच्चे तेल के भाव में 12 फीसदी तक की गिरावट आई है, जिससे ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। यह भारत के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि देश अपनी तेल आवश्यकता का 85 फीसदी आयात करता है। इससे आयात बिल कम होगा, चालू खाता घाटा घटेगा और सरकारी खजाने पर आर्थिक pressure कम होगा।
इसके अलावा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा दूर होने से भारतीय शेयर बाजारों में भी सकारात्मक impact पड़ा है। हालांकि भारत के बाजार बंद थे, लेकिन गिफ्ट निफ्टी में 2 फीसदी यानी 400 से अधिक अंकों की तेजी दर्ज की गई। यह सोमवार को बाजार की मजबूत शुरुआत का संकेत है। HPCL, BPCL, IOC, पेंट, टायर और एविएशन क्षेत्रों में खरीदारी के आसार हैं। विदेशी निवेशकों का भारत के प्रति confidence भी बढ़ सकता है।
हैरानी की बात यह है कि सोने और चांदी में भी अचानक तेजी आई है, जबकि आमतौर पर तनाव कम होने पर इनकी मांग घट जाती है। लेकिन इस बार निवेशकों ने तनाव शमन की स्थिति में भी investment के अवसर देखे। MCX पर चांदी में 5 फीसदी की तेजी है और 2.61 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार हो रहा है। सोना भी 1.5 फीसदी बढ़कर 10 ग्राम के हिसाब से 1.55 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने भी 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि होर्मुज अब पूरी तरह खुल गया है और व्यापार के लिए तैयार है। उन्होंने ईरान का धन्यवाद किया। यह कूटनीतिक move न केवल वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक booster shot के रूप में काम कर सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से न सिर्फ आयात बिल कम होगा, बल्कि inflation मुद्रास्फीति पर भी नियंत्रण आएगा। ये आम आदमी के लिए भी अच्छी खबर है।
ट्रंप का ट्वीट देखकर लगता है कि वो हर कूटनीतिक development विकास पर अपनी मुहर लगाना चाहते हैं। चाहे उनका इसमें कोई योगदान हो या न हो।
होर्मुज बंद होने पर जो दबाव था, वो अब कम हुआ है। लेकिन क्या ये शांति स्थायी होगी? इस uncertainty अनिश्चितता के बीच बाजारों की प्रतिक्रिया थोड़ी जल्दबाजी लग रही है।
अगर तेल सस्ता हुआ तो डीजल-पेट्रोल के दाम कब तक गिरेंगे? सरकार subsidy सब्सिडी कम करेगी या कीमतें? ये सवाल अभी खुला है।
मिडिल-ईस्ट में तनाव कम होना न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी एशिया के लिए अच्छा है। ये क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ा कदम है।
सोने में तेजी को देखकर लगता है कि निवेशकों को अभी भी कुछ risk जोखिम दिख रहा है। वो सुरक्षित जगह में पैसा लगा रहे हैं, लेकिन बाजार में भी उत्साह है।