शेयर बाजार में आज से पूरे 5 दिनों तक इन कारणों से मच सकती है बड़ी उथल-पुथल
इस सप्ताह भारतीय stock market में भारी उथल-पुथल की आशंका है, और निवेशकों की नजर एक साथ कई बड़े factors पर है। 20 अप्रैल से शुरू हो रहे सप्ताह में बाजार की दिशा तय करने में global घटनाएं, कच्चे तेल की कीमतें और बड़ी कंपनियों के तिमाही परिणाम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 1.21% बढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी 1.25% की growth दर्ज करने में सफल रहा।
विश्लेषकों के मुताबिक, geopolitical तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच 22 अप्रैल को समाप्त हो रहे सीजफायर के बाद की situation , बाजार को झकझोर सकती है। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजित मिश्रा ने कहा कि इस संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक जोखिम भावना पर सीधा असर पड़ेगा। अगर ईरान फिर से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात रोकता है, तो तेल आपूर्ति में बाधा आ सकती है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
घरेलू स्तर पर सबकी नजर quarterly results पर है। एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही में 20,350.76 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 8.04% अधिक है। हालांकि, बैंक ने मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण छोटे व्यापारियों पर जोखिम का भी जिक्र किया। इसी तरह, आईसीआईसीआई बैंक ने 14,755 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया, जिसमें provisioning में गिरावट ने अहम भूमिका निभाई।
इस सप्ताह एचसीएल टेक्नोलॉजीज़, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, हेवेल्स, इंडसइंड बैंक और श्रीराम फाइनेंस जैसी कंपनियों के भी नतीजे आने हैं। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के संतोष मीना का मानना है कि इन earnings reports का बाजार पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुदि आर ने कहा कि निवेशक अमेरिका-ईरान वार्ता में स्थायी समाधान के signals की ओर भी ध्यान देंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चा तेल stable या सस्ता रहता है, तो यह इक्विटी बाजार को समर्थन दे सकता है। लेकिन कोई भी अचानक बदलाव निवेशकों में panic पैदा कर सकता है। वैश्विक पूंजी प्रवाह, जोखिम भावना और भारतीय रुपये की value पर भी इन सभी तत्वों का असर देखने को मिलेगा।
बाजार की अस्थिरता के इस दौर में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना चाहिए।
अमेरिका-ईरान वार्ता के बारे में news updates समाचार अद्यतन कहां से भरोसेमंद तरीके से मिलेंगे?
हर कोई बैंकों के नतीजों पर ध्यान दे रहा है, लेकिन IT sector आईटी क्षेत्र के नतीजे आने वाले दिनों में बड़ा impact प्रभाव डाल सकते हैं।
तेल की कीमतों में उछाल से न केवल महंगाई बढ़ेगी, बल्कि interest rates ब्याज दरों पर भी दबाव पड़ेगा।
इतने सारे factors कारक एक साथ काम कर रहे हैं कि समझ नहीं आ रहा कि बाजार कहां जाएगा।
क्या विदेशी संस्थागत निवेशक इस सप्ताह net buyers शुद्ध खरीदार बने रहेंगे या बिकवाली तेज होगी?
अगर ईरान फिर से तेल आपूर्ति रोकता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
अभी के लिए, मेरी रणनीति hold होल्ड करने की है। जब तक स्पष्टता न हो, new investments नए निवेश में जोखिम बहुत ज्यादा है।