पवन खेड़ा कोई बब्बर शेर नहीं, बल्कि भीगी बिल्ली हैं, भाजपा का कांग्रेस नेता पर निशाना
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पवन खेड़ा को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की पत्नी के खिलाफ उनके allegations से जुड़े मामले में संभावित दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा न देने के फैसले के बाद, भाजपा ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पर जोरदार attack किया। भाजपा का कहना था कि यह फैसला खेड़ा के राजनीतिक प्रेरित और baseless के अभियान को उजागर करता है।
पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो में दावा किया कि खेड़ा द्वारा पेश किए गए दस्तावेज forged , फोटोशॉप किए गए और एआई द्वारा उत्पन्न पाए गए। उन्होंने कहा, "आधे घंटे में पूरी सच्चाई सामने आ गई।" उनके अनुसार, खेड़ा ने अदालत में भी fake evidence पेश की, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर संकट खड़ा हो गया है।
पूनावाला ने दावा किया कि खेड़ा ने पाकिस्तान के direction पर इस्लामाबाद से जारी जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर हिमंत सरमा और उनकी पत्नी की राजनीतिक हत्या करने की कोशिश की। इस आरोप के साथ, उन्होंने खेड़ा के आचरण पर सवाल उठाए। "वे झूठ का जाल बुन चुके हैं और अब fugitive की तरह छिप रहे हैं," उन्होंने कहा, "खेड़ा कोई बब्बर शेर नहीं, बल्कि भीगी बिल्ली हैं।"
कोर्ट ने खेड़ा की याचिका पर hearing करने से इनकार कर दिया और उन्हें असम के सक्षम न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए approach करने को कहा। इससे पहले, 5 अप्रैल को खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि सरमा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति है, जो उनके चुनावी affidavit में घोषित नहीं थी। आरोपित पक्ष ने इन दावों को झूठा बताया है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला खेड़ा के लिए बड़ा setback झटका है। जब तक आप evidence सबूत ठोस नहीं लाते, राजनीतिक हमले दुर्भावना लगते हैं।
एआई से जाली दस्तावेज? यह डरावना है। technology तकनीक का दुरुपयोग राजनीति में और बढ़ेगा।
पूनावाला को 'भीगी बिल्ली' बोलने से क्या फर्क पड़ता है? सच तो यह है कि जवाबदेही की कमी हर तरफ है।
खेड़ा ने जोखिम लिया, लेकिन proof प्रमाण नहीं थे। अब उल्टा उन पर ही मामला बन रहा है।
क्या सच में पाकिस्तान के हस्तक्षेप का कोई सबूत है? या बस भावनाओं को भड़काने की कोशिश है?
अदालत ने जमानत के लिए कहा, तो वह legal process कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। भाजपा को इसे राजनीतिक तरह से नहीं उछालना चाहिए।