एक जीत, एक उद्घाटन: विराट का वो पल जब जश्न बन गया संदेश
एक दिन पहले अरुण जेटली स्टेडियम में दिल्ली को defeat , अगले दिन आरके पुरम के कॉरिडोर में बच्चों के बीच घिरे विराट कोहली। यह नहीं था कोई मैच, बल्कि एक ceremony — दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) के मैदान में वेस्ट दिल्ली क्रिकेट अकैडमी (WDCA) की नई शाखा का inauguration । जहां कल उन्होंने बल्लेबाजी की थी, आज वह बच्चों को जीवन की बल्लेबाजी के बारे में advice दे रहे थे। आईपीएल की धूल अभी हवा में थी, लेकिन विराट के कदमों में बचपन की यादों का वजन था।
RCB ने दिल्ली कैपिटल्स को महज 6.3 ओवर में 9 विकेट से धो डाला था। टॉप ऑर्डर ढह गया, टीम 75 रन पर ऑलआउट। लेकिन इस जीत के बाद विराट ने मैदान छोड़ा नहीं — बस बदल दिया। अब वह एक ऐसे institution में थे जहां क्रिकेट की शुरुआत होती है, जहां ड्रेसिंग रूम की जगह बेंच और चॉक की गंध है। उनके साथ थे उनके childhood के कोच राजकुमार शर्मा, जैसे समय ने एक पूरा चक्र पूरा कर लिया हो।
विराट ने छात्रों को address करते हुए कहा, 'मैं स्कूल में बोलने का आदी नहीं हूं। मैं बहुत पहले ही क्रिकेट के लिए स्कूल से दूर हो गया था।' यह था एक सच्चे जुनून का इक़रार। उन्होंने बच्चों को समझाया कि स्कूल वह जगह है जहां आप एक अच्छा individual बनने आते हैं। फोकस और प्राथमिकताएं बदलना आसान नहीं, लेकिन अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, तो वही बदलाव सफलता की नींव बन जाता है। उन्होंने acknowledge किया कि उनकी प्राथमिकताएं बहुत पहले बदल गई थीं।
इस दौरान उन्होंने उभरते क्रिकेटरों को trophy और शील्ड भी दी। एक ऐसा पल जब एक victory का जश्न सिर्फ स्कोरकार्ड तक सीमित नहीं था, बल्कि अगली पीढ़ी तक पहुंच रहा था। विराट का यह दौरा केवल एक formality नहीं था — यह था एक संदेश: क्रिकेट केवल रन बनाना नहीं, यह है छोटे कदमों का सम्मान करना। जब आप शहर की धरती पर खेलते हैं, तो आपकी जीत का मतलब बस अंक नहीं होता — यह है प्रेरणा का संचरण।
कोहली ने ना सिर्फ मैच जीता, बल्कि बच्चों के दिल भी। यही है असली विरासत।
DPS RK पुरम में अकादमी खुलना अच्छी बात है, लेकिन क्या यह सिर्फ एक publicity प्रचार चाल है?
विराट के बचपन के कोच के साथ देखकर आंखें नम हो गईं। इंसानियत बची है।
RCB जीती तो मैं खुश, लेकिन कोहली का ये कदम सच में impact प्रभाव डालेगा।
हमारे स्कूल में विराट का आना गर्व की बात है, चाहे मैच हारे भी क्यों न हों।
75 रन का टारगेट 6.3 ओवर में? ये कोई टी20 नहीं, मास्टरक्लास थी।
अगर मेरे स्कूल में ऐसा होता, तो मैं भी क्रिकेटर बनने का dream सपना देखता।