एक साथ खेले, आज एक साथ फैसला करते — अर्गल का अनोखा चक्र
एक बार वो उसी मैदान पर field पर बल्लेबाजी करते थे जहाँ आज वे अंपायर के रूप में पहुंचते हैं — ऐसा चक्र जो शायद ही कभी क्रिकेट इतिहास में दोहराया गया हो। player अजितेश अर्गल और भारत के कप्तान विराट कोहली एक समय युवा टीम में साथ खेले थे, tournament के लिए एक ही सपने को साझा करते हुए। आज, जब आईपीएल के stadium में वे फैसले लेते हैं, तो वही पिच जो एक बार उनके स्विंग को जानती थी, आज उनकी नजरों का केंद्र है।
2006 के अंडर-19 विश्व कप में अर्गल और कोहली ने एक साथ भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई — एक ऐसी घटना जो तब के युवा cricketer के लिए गर्व का विषय थी। लेकिन फिर करियर ने एक अलग मोड़ लिया। जहां कोहली अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंचे, वहीं अर्गल ने सरकारी नौकरी के option को ठुकरा दिया और क्रिकेट के नए रास्ते को अपनाया — अंपताई की दुनिया में कदम रखा।
आज, आईपीएल में उनकी उपस्थिति सिर्फ एक career बदलाव नहीं, बल्कि एक प्रतीक है — यह दिखाता है कि क्रिकेट के प्रति समर्पण कई रूपों में आ सकता है। वे उसी game के अंदर बने रहे, लेकिन अब नियमों के रक्षक बनकर। उनकी यात्रा में न तो चमक गायब हुई, न ही जुनून। बस भूमिका बदली — संक्रमण ऐसा, जो कई खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
अर्गल का मानना है कि अंपताई में भी ईमानदारी और focus की उतनी ही जरूरत होती है जितनी किसी बल्लेबाजी पारी में। जब वे मैदान पर खड़े होते हैं, तो शायद उन्हें वो युवा दिन याद आते हों, जब वे और कोहली एक साथ चैंपियनशिप जीतकर झूम उठे थे। लेकिन आज की भूमिका में, जब कोहली फिर से बल्ला लेकर आते हैं, तो अर्गल की नजर न किसी रन पर, बल्कि कानूनों के भावना पर होती है।
अंपायर बनना भी एक तरह का comeback वापसी है, खेल के प्रति प्रेम दिखाता है।
सरकारी नौकरी छोड़कर ये रास्ता चुनना, ये तो बहुत बड़ा risk जोखिम था।
क्या अब अंपायर को भी फैंस मिलेंगे, जैसे खिलाड़ियों को मिलते हैं?
एक साथ खेले, अब एक साथ मैच के decision निर्णय पर खड़े। क्या बात है!
कोहली तो सुपरस्टार, लेकिन अर्गल का सफर ज्यादा प्रेरणादायक है।
ये दिखाता है कि खेल में रहने के कई pathway मार्ग होते हैं, सिर्फ प्रदर्शन नहीं।