झारखंड में सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन, विपक्ष ने उठाया सवाल
झारखंड में विपक्षी दल भाजपा ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है कि वित्तीय mismanagement के कारण government employees को मार्च के अंत तक नहीं तो अप्रैल के 11वें दिन तक भी salary नहीं मिला। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने रांची में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि 26 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब payment इतने लंबे समय तक लंबित है।
उन्होंने बताया कि सीधे तौर पर 2,35,930 सरकारी officials और कर्मचारियों के अलावा लगभग 45,000 संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को भी पैसा नहीं मिला। इसका मतलब है कि करीब 2.75 लाख परिवारों की economy ठप हो गई है। प्रतुल ने कहा कि इन परिवारों को अब ration के लिए, बच्चों की fees और ईएमआई भरने में भी दिक्कत हो रही है।
सरकार के पास आमतौर पर 5 अप्रैल तक बजट के आधार पर भुगतान करने का इतिहास रहा है, लेकिन इस बार वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी के कारण funds ही उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि 31 मार्च को बजट के 22,000 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए जा सके क्योंकि खजाने में पैसा नहीं था।
इसके विपरीत, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के लिए 100 करोड़ रुपये का luxury project का निर्माण आगे बढ़ रहा है। प्रतुल ने बताया कि मूल भवन की लागत 67 करोड़ है और इंटीरियर, स्विमिंग पूल, जकूजी जैसी सुविधाओं के लिए टेंडर भी निकाल दिया गया है।
उन्होंने प्रश्न किया कि क्या झारखंड भी हिमाचल की तरह कर्ज लेकर salary payments करेगा? प्रतुल ने जोर देकर कहा कि जब केंद्र ने 31 मार्च तक 2692 करोड़ रुपये का fund transfer किया, तो भी खजाना खाली कैसे हो गया? यह सरकार की priority पर सवाल खड़ा करता है।
सरकार के पास luxury आलीशान परियोजनाओं के लिए पैसा है, लेकिन employees कर्मचारियों के वेतन में देरी? यह trust भरोसा तोड़ने वाला है।
मेरे पड़ोस में तीन सरकारी स्कूल शिक्षक हैं। सभी worried चिंतित हैं। बच्चों की education शिक्षा पर क्या impact असर पड़ेगा?
क्या यह सिर्फ mismanagement गलत प्रबंधन है या जानबूझकर की गई उपेक्षा? जवाबदेही कौन लेगा?
अपने household घर का बजट भी अगर इतना खराब होता, तो हमें pressure दबाव महसूस होता। सरकार को भी एहसास होना चाहिए।
केंद्र से मिले funds धन का उपयोग न कर पाना और फिर blame आरोप लगाना—यही तो problem समस्या है।
अगर advance एडवांस का इंतजार है, तो साफ है कि revenue collection राजस्व वसूली में फेल हैं। क्या उबरने की कोई योजना है?