ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश पर तंज: 'चेलों की बात मानकर कम आंका, अब मुलाकात चुनाव के बाद होगी'

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर चुनावी माहौल में तीखा हमला किया है—इस बार लक्ष्य हैं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव। आजमगढ़ के नेहरू हाल में एक कार्यक्रम के दौरान राजभर ने कहा, "अखिलेश यादव ने अपने followers की बात मानकर समझा कि पूर्वांचल में कुछ नहीं है। लेकिन अब चुनाव के बाद ही हमारी मुलाकात होगी।" यह टिप्पणी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि साफ संकेत है कि राजभर अपनी राजनीतिक ताकत को स्थापित करने के लिए पूर्वांचल की जनता की गिनती बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

कार्यक्रम में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) में अल्पसंख्यक मोर्चे के 27 कार्यकर्ताओं के शामिल होने पर राजभर ने इसे अपनी रणनीतिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को धोखा देने का आरोप सपा पर लगाते हुए example दिया—गुड्डू जमाली का। राजभर का आरोप है कि अगर जमाली के नाम के आगे "यादव" होता, तो उन्हें निश्चित टिकट मिल जाता। यह आरोप न सिर्फ सामाजिक न्याय के मुद्दे को छेड़ता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राजभर मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में खींचने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

विधानसभा चुनाव को लेकर अतरौलिया सीट पर राजभर ने silence साध ली, लेकिन आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की victory की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। उन्होंने कहा, "मेरे बिना पूर्वांचल का समीकरण संभव नहीं है।" साथ ही वे जहूराबाद सीट से 60,000 वोटों से जीतने का भी दावा कर बैठे। यह न सिर्फ आत्मविश्वास की बात है, बल्कि एक संदेश है—उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता अब नजरअंदाज नहीं की जा सकती।

राजभर ने कार्यक्रम में education के माध्यम से उठते मुस्लिम युवाओं के लक्ष्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस साल UPSC में 53 मुस्लिम छात्र success हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 51 थी। इस आंकड़े को उन्होंने प्रगति का संकेत बताया। उनका आह्वान था—लोगों को रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और दवाई चाहिए, न कि नफरत की politics

निषाद समुदाय की नाराजगी के सवाल पर राजभर ने smile कहा, "कोई नाराज नहीं है, शायद आप नाराज हो सकते हैं, लेकिन public पूरी तरह साथ है।" यह जवाब न सिर्फ विनम्रता दिखाता है, बल्कि राजनीतिक घेराबंदी से बचने की चाल भी है। उनका दावा है कि सुभासपा अब ब्राह्मण, राजपूत, यादव, मुसलमान, चौहान, मौर्य और प्रजापति समेत सभी वर्गों की पसंद बन रही है। यह बदलाव एक संदेश देता है—पूर्वांचल की राजनीतिक भूलिख अब ओम प्रकाश राजभर से ignore नहीं कर सकती।

टिप्पणियाँ 8

  • सपेरा_गांववाला

    बहुत बड़ा दावा है 60,000 वोटों से जीतने का। देखते हैं, results आने दो। अब तक तो सपा और बसपा के बीच बैलेंस था, नया खिलाड़ी कैसे पैर जमाता है, यही देखना है।

  • मुस्लिम_आवाज

    गुड्डू जमाली का उदाहरण बहुत प्रासंगिक है। अगर टिकट नाम के आधार पर मिलता है, तो अल्पसंख्यक आवाज कब तक दबेगी? राजभर सही कह रहे हैं कि प्रतिनिधित्व जरूरी है।

  • यूपी_का_योद्धा

    आजमगढ़ में सपा का दबदबा था, लेकिन अब बदलते समीकरण दिख रहे हैं। राजभर ने बुद्धिमानी से अल्पसंख्यकों के साथ जुड़ाव बनाया है। राजनीतिक खेल बदल रहा है।

  • निषाद_बेटा

    हम निषाद समाज नाराज हैं, लेकिन राजभर क्यों नहीं मान रहे? अनदेखा करना कोई समाधान नहीं। अगर पार्टी के leaders ही आंखें मूंद लें, तो असंतोष कैसे शांत होगा?

  • गली_की_बात

    मुस्कुरा-मुस्कुराकर बयान देना एक बात है, और जमीनी हकीकत कुछ और। लेकिन हां, नफरत की राजनीति की जगह रोटी-कपड़ा की बात करना कम से कम respect दिलाता है।

  • प्रगति_की_राह

    UPSC के नतीजे वाकई खुशी की बात हैं। मुस्लिम युवा education के माध्यम से आगे बढ़ रहे हैं। अब उन्हें jobs और अवसर मिलने चाहिए—सिर्फ टिकट नहीं।

  • चुपचाप_चौधरी

    अखिलेश यादव अब followers के भरोसे नहीं चल सकते। पूर्वांचल में नई दावेदारी उभरी है। राजभर ने एक साफ संदेश दिया है—मैं अब बातचीत के लिए तैयार हूं।

  • बसपा_वाली

    सुभासपा को सभी वर्गों की पसंद बताना अच्छा लगा, लेकिन proof कहां हैं? मैं तो देख रही हूं कि गठबंधन की राजनीति में कौन किसके साथ बैठता है।