ईरान ने कहा: हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं

मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ किया है कि उनका लक्ष्य solution है, न कि युद्ध। एक जारी बयान में उन्होंने कहा कि ईरान dialogue और सहयोग के जरिए स्थिरता चाहता है, लेकिन दूसरे देशों के दखलंदाजी या दबाव को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिका और इजरायल को सीधे शब्दों में कहा कि अगर कोई ईरान पर अपनी शर्तें impose की कोशिश करेगा, तो वह failure होगा।

पेजेशकियान ने अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि नागरिकों, बच्चों और बुद्धिजीवियों को निशाना बनाने या स्कूल-अस्पताल जैसी critical institutions को नष्ट करने का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले न केवल अमानवीय हैं, बल्कि global peace के लिए खतरा भी पैदा करते हैं।

इस बयान के पीछे 28 फरवरी की घटना है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त military operation शुरू किया, जिसमें तेहरान समेत कई शहरों पर हमले हुए। जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर प्रतिक्रिया strike किया। इस आदान-प्रदान ने पूरे क्षेत्र में tension को नई ऊंचाई दे दी।

तनाव घटाने की कोशिश में 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत हुई, जहां ईरानी संसद अध्यक्ष गलिबाफ और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले दल शामिल हुए। लेकिन कई दौर की वार्ता के बावजूद कोई breakthrough नहीं हुआ। दोनों पक्षों ने माना कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर disagreement बने हुए हैं।

राष्ट्रपति ने फिर से जोर देकर कहा कि ईरान संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा और किसी भी देश के दबाव में आकर surrender करने की कोई योजना नहीं है। उनका संदेश स्पष्ट है: बातचीत का दरवाजा खुला है, लेकिन अगर दबाव बढ़ा, तो ईरानी जनता इसे कभी accept नहीं करेगी।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • निरंकुश

    हर बार यही कहा जाता है कि बातचीत चाहिए, लेकिन military action कब तक चलती रहेगी?

  • सच्चाईवाला

    अमेरिका भी शांति की बात करता है, लेकिन उसकी foreign policy हमेशा दखलंदाजी वाली रही है।

  • अर्जुन

    ईरान ने साफ कह दिया है कि वह pressure में नहीं झुकेगा। यह बहुत बड़ी बात है।

  • महेंद्र

    स्कूल और अस्पताल जैसी जगहों पर हमला करना inhuman है। कोई भी इसे सही नहीं ठहरा सकता।

  • समझदार

    इस्लामाबाद में बातचीत विफल हुई, लेकिन क्या वास्तव में दोनों तरफ से serious intent था?

  • सुरक्षा

    अगर तनाव बढ़ता रहा, तो पूरे मध्य पूर्व में आर्थिक और सुरक्षा संकट बढ़ेगा।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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