मैक्सिमम प्रेशर 2.0: ट्रंप की पुरानी रणनीति और ईरान का नया चक्रव्यूह
अमेरिका ने ईरान पर economic pressure बढ़ाने के लिए उसके बंदरगाहों की पूरी तरह blockade कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि इससे ईरान को बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है। लेकिन इस बार स्थिति पहले जैसी नहीं है। ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य जैसा रणनीतिक फायदा है, जहां से दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल गुजरता है। अब सवाल यह है कि क्या यह maximum pressure रणनीति अमेरिका के खिलाफ ही मुड़ जाएगी?
ईरान ने अब तक झुकने के बजाय strategic advantage का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। वह धमकी दे रहा है कि वह जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है या toll tax लगा सकता है। इसका मतलब है कि अमेरिका की नाकेबंदी से नुकसान सिर्फ ईरान को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को होगा। जब तेल की global supply प्रभावित होगी, तो कीमतें आसमान छूएंगी।
और यहीं से खतरा शुरू होता है। तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ेगा। fuel prices बढ़ेंगी, जिससे ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ेगी। फल, सब्जियां और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो जाएंगी। इसका असर inflation में तेजी से उछाल के रूप में देखा जा सकता है, जो अमेरिका जैसे देशों में भी घरेलू राजनीति पर दबाव डालेगा।
एक बड़ी चुनौती यह भी है कि अमेरिका को अपने सहयोगियों का पूरा समर्थन नहीं मिल रहा। ब्रिटेन और स्पेन जैसे देशों ने नाकेबंदी पर सवाल उठाए हैं। चीन, जो ईरान का बड़ा खरीदार है, वह भी इस policy के खिलाफ है। ऐसे में ईरान को अलग-थलग करना मुश्किल लग रहा है।
इस टकराव में अब सवाल सिर्फ ताकत का नहीं, बल्कि धैर्य का है। दोनों तरफ के नेता political cost का हिसाब लगा रहे हैं। क्या ट्रंप की रणनीति उनके लिए राजनीतिक संकट बन जाएगी? क्या ईरान वाकई में पूरी दुनिया को बंधक बना सकता है? इस बार tension का खेल इतना खतरनाक है कि एक गलत कदम वैश्विक crisis को न्यौता दे सकता है।
अगर ईंधन के दाम बढ़े तो सब चीजों के दाम में direct impact सीधा असर पड़ेगा, आम आदमी पहले ही महंगाई से त्रस्त है।
ट्रंप बार-बार एक ही playbook प्लेबुक क्यों इस्तेमाल करते हैं? यह रणनीति चीन के साथ भी आधी-अधूरी रही थी।
ईरान को अलग करना इतना आसान नहीं है। चीन और रूस जैसे देश उसका साथ देंगे ही। भू-राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं।
होर्मुज पर कोई छोटी सी military escalation सैन्य बढ़ोतरी भी वैश्विक बाजार में तहलका मचा सकती है।
अमेरिका के लिए यह double-edged sword दोधारी तलवार साबित हो सकती है। दबाव बनाना आसान है, लेकिन नतीजों को झेलना मुश्किल।
क्या वाकई में ट्रंप को public reaction जन प्रतिक्रिया की परवाह है, या वह सिर्फ 2028 के चुनाव के लिए दिखावा कर रहे हैं?