ट्रंप बनाम ओबामा: ईरान मुद्दे पर एक बड़ी रणनीतिक चूक?

ईरान के साथ तनाव एक बार फिर global economy के लिए खतरे का संकेत बन गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी जहाजों के लिए बंद करने का फैसला किया, जिसके बाद ईरान ने retaliation की धमकी देते हुए अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने की घोषणा कर दी। इस बीच, पाकिस्तान द्वारा संचालित शांति वार्ता विफल हो चुकी है, जिससे युद्ध की आशंका और बढ़ गई है।

ट्रंप ने 28 फरवरी को ईरान पर military strike करने की योजना बनाई थी और ईरान में शासन परिवर्तन को अपना लक्ष्य घोषित किया था। लेकिन पांच हफ्तों के संघर्ष के बाद भी वह इस लक्ष्य में success हासिल नहीं कर पाए। इसके बजाय, ईरान ने होर्मुज पर अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा impact पड़ा। अमेरिका केवल धमकियां देता रहा, जबकि ईरान की स्थिति अधिक मजबूत होती गई।

इस मामले में ट्रंप के दृष्टिकोण की तुलना उनके पूर्ववर्ती बराक ओबामा से लगातार की जा रही है। ओबामा ने ईरान के साथ nuclear deal किया था, जिसके तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को freeze कर दिया था। यह समझौता पश्चिम एशिया में शांति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। लेकिन ट्रंप ने इस समझौते पर खुला criticism की और 2018 में इसे रद्द कर दिया, जिसके बाद ईरान ने फिर से अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू कर दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप के decision ने न केवल ईरान को मजबूत किया, बल्कि अमेरिका की वैश्विक credibility पर भी सवाल खड़े कर दिए। पूर्व सीआईए निदेशक जनरल डेविड पेट्रायस का कहना है कि अब ईरान उन शर्तों पर वापस नहीं आएगा जो ओबामा के समय थीं। ईरान ने युद्ध के बाद strategic advantage हासिल कर ली है और होर्मुज पर अपना नियंत्रण बरकरार रखने का इरादा रखता है।

इस स्थिति में, अगर अमेरिका ने ईरान को होर्मुज से जहाजों के लिए tax लगाने की अनुमति दे दी, तो यह उसके लिए एक बड़ी policy failure होगी। 20 लाख डॉलर प्रति जहाज के हिसाब से ईरान को पर्याप्त धन मिलेगा, जिससे उसकी सेना और अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी। इसका मतलब है कि अमेरिका के दशकों पुराने economic sanctions बेअसर हो जाएंगे।

टिप्पणियाँ 6

  • देश_की_दिशा

    ट्रंप को ओबामा के समझौते को रद्द करने से पहले सोचना चाहिए था। अब ईरान ने अपना nuclear program फिर शुरू कर दिया है।

  • समझदार_आवाज

    युद्ध से हमेशा अर्थव्यवस्था पर negative impact पड़ता है। वैश्विक बाजार अब और अस्थिर नहीं हो सकते।

  • रणनीति_विश्लेषक

    होर्मुज पर नियंत्रण का मतलब है energy security पर कब्जा। अगर ईरान ने कर लगाया, तो यह वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव लाएगा।

  • शांति_प्रेमी

    ओबामा ने बातचीत से शांति बढ़ाई थी। ट्रंप ने conflict का रास्ता चुना और अब परिणाम भुगत रहे हैं।

  • तथ्य_जांच

    क्या वाकई पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का सीजफायर पोस्ट व्हाइट हाउस से जारी किया गया था? यह transparency का सवाल है।

  • भविष्य_दृष्टा

    अगर ईरान को यूरेनियम के स्टॉक की जगह छिपाने की आजादी है, तो nuclear threat बना रहेगा।