ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या होगा असर?
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से peak पहुंच गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में 20 घंटे से अधिक चली शांति वार्ता collapse हो गई, जिसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वापस चले गए। सीजफायर के बाद जहां दुनिया को थोड़ी relief मिली थी, अब वापस युद्ध की threat मंडरा रहा है। मध्य पूर्व में हालात तेजी से worsen जा रहे हैं, जहां ईरान अपनी मांगों पर अड़ा है और अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का pressure बना रहा है।
ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी economy को संभालना है। युद्ध के कारण उसके तेल निर्यात में 45 फीसदी की गिरावट आई है। भले ही oil price बढ़ने से राहत मिली हो, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसका व्यापार severely सीमित है। इसके अलावा, सुप्रीम लीडर अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ नेताओं की हत्या के बाद देश में interim नेतृत्व चल रहा है, जो आंतरिक instability को बढ़ा रहा है।
अमेरिका के लिए यह संघर्ष केवल सैन्य नहीं, बल्कि diplomatic और आर्थिक मोर्चे पर भी चुनौती बन गया है। राष्ट्रपति ट्रंप दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत को नष्ट कर दिया है, लेकिन ईरान के तेज retaliation ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। अब वाशिंगटन एक honorable रास्ता खोजने में जुटा है ताकि बिना नुकसान के इस जंग से बाहर निकला जा सके।
पूरी दुनिया के लिए तेल की आपूर्ति का सबसे संवेदनशील बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से वैश्विक तेल का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग halt हो गई है। मार्च 2026 में ब्रेंट क्रूड ऑयल 126 डॉलर प्रति बैरल के record स्तर पर पहुंच गया था। तेल के अलावा एल्युमीनियम, उर्वरक और हीलियम जैसे raw material की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
भारत के लिए भी यह संकट serious है। देश का लगभग 60 फीसदी कच्चा तेल और रसोई गैस इसी रास्ते से आयात होता है। पहले से ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की shortage देखी जा रही है। सरकार का दावा है कि अभी कोई crisis नहीं है, लेकिन लंबे संघर्ष की स्थिति में एलपीजी की कमी हो सकती है। इसलिए सरकार पाइप गैस (PNG) के नेटवर्क का rapid विस्तार कर रही है और रूस जैसे देशों से नए आयात मार्ग भी तलाश रही है।
अगर तेल की कीमत और बढ़ी तो common man आम आदमी का बजट पूरा बिगड़ जाएगा।
ये सब बड़ी ताकतों का खेल है, लेकिन ordinary people आम लोग को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ता है।
क्या सरकार वाकई तैयार है? LPG shortage एलपीजी की कमी पहले से ही दिख रही है।
होर्मुज पर नियंत्रण का मतलब है global pressure वैश्विक दबाव में बदलाव।
ईरान के प्रॉक्सी संगठन हिज्बुल्लाह और हूती भी regional risk क्षेत्रीय जोखिम बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका को युद्ध से बाहर निकलने के लिए strategic exit रणनीतिक बहिर्गमन चाहिए, न कि बस घोषणाएं।