हो ची मिन्ह सिटी: जहां संस्कृति बनी विकास की इंजन
हो ची मिन्ह सिटी में संस्कृति अब केवल एक आत्मिक अनुभव नहीं रही — यह विकास की एक बहुआयामी engine बन गई है। आउटडोर फिल्म स्क्रीनिंग से लेकर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव तक, शहर अब रचनात्मक कलाकारों, निवेशकों और जनता के लिए एक गतिशील पारिस्थितिकी तंत्र बना रहा है। इसकी नींव में वियतनाम के नीतिगत संकल्प नवोन्मेष पर जोर देने वाले 80-NQ/TW के अनुरूप एक नई vision छुपी है — संस्कृति में निवेश को अब सतत विकास की राह माना जा रहा है।
2024-2025 की अवधि के लिए घोषित '2030 तक सांस्कृतिक उद्योग विकास' परियोजना के तहत शहर ने आठ क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है: film , प्रदर्शन कला, ललित कला, फोटोग्राफी, प्रदर्शनियां, विज्ञापन, tourism और फैशन। यह कोई साधारण सूची नहीं — यह एक रणनीतिक ढांचा है जो संस्कृति को पर्यटन, रात्रिकालीन economy और सार्वजनिक जीवन के साथ जोड़ता है। होज़ो संगीत महोत्सव जैसे आयोजन न केवल कलाकारों के लिए मंच देते हैं, बल्कि शहर के लिए एक विशिष्ट brand भी बना रहे हैं।
इस परिवर्तन के पीछे तीन स्तंभ खड़े हैं: संस्थाएं, अवसंरचना और बाजार। शहर अब 'प्रबंधन' से आगे बढ़कर 'निर्माण' पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। अप्रैल 2026 तक खुलने वाला फु थो सर्कस और बहुउद्देशीय प्रदर्शन हॉल इसी की झलक है — एक आधुनिक venue जो बड़े पैमाने के आयोजनों को संभव बनाएगा। यही नहीं, संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्थलों का डिजिटलीकरण भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। टोन डुक थांग संग्रहालय की इंटरैक्टिव स्क्रीनें और QR कोड वाले डिजिटल मानचित्र दर्शकों के experience को बदल रहे हैं।
हो ची मिन्ह शहर का यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क में शामिल होना इस दृष्टिकोण की वैश्विक मान्यता है। अब शहर को अपने फिल्म बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन प्रशिक्षण और वितरण प्रणाली में सुधार करना होगा। लक्ष्य स्पष्ट है: 2030 तक सांस्कृतिक उद्योग का राजस्व 148,000 बिलियन वीएनडी तक पहुंचना और शहर के जीडीपी में 7-8% का योगदान देना। यह revenue सिर्फ आंकड़ा नहीं — यह एक संकेत है कि संस्कृति अब बजट के दया पर नहीं, बल्कि investment के आधार पर चल रही है।
आगे की राह में डिजिटल प्लेटफॉर्म और वार्षिक उत्सव जैसे पहल महत्वपूर्ण होंगी। 'हो ची मिन्ह सिटी कल्चरल स्पेस' कार्यक्रम के तहत दस्तावेजों और सांस्कृतिक सामग्री को ऑनलाइन लाने का लक्ष्य है। यह न केवल जन तक पहुंच बढ़ाएगा, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के प्रबंधन और शिक्षा में भी मदद करेगा। यहां संस्कृति केवल देखी नहीं जा रही — उसे operated , मूल्यांकित और बाजार के साथ जोड़ा जा रहा है।
ये बदलाव अच्छा है, लेकिन क्या सच में artists कलाकारों को इसका फायदा मिलेगा?
संस्कृति को बाजार के हिसाब से ढालना खतरनाक भी हो सकता है। क्या यह स्वाभाविकता खो नहीं देगा?
होज़ो म्यूजिक फेस्टिवल में विदेशी कलाकारों को शामिल करना एक step कदम है जो ब्रांडिंग में मदद करेगा।
डिजिटल प्रदर्शनी से जो पहुंच बढ़ेगी, वो छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए वरदान है।
148,000 बिलियन वीएनडी का लक्ष्य बहुत महत्वाकांक्षी है। क्या बुनियादी ढांचा समय पर तैयार होगा?
बाहर फिल्म देखने का अनुभव बिल्कुल अलग होता है। ऐसे events आयोजन शहर की रूह जगाते हैं।