विक्रम भट्ट ने बताई जेल की वो कहानी जब बीमारी में भी नहीं मिली मदद, बोले—मैं मरना नहीं चाहता

मशहूर फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट ने हाल ही में अपने जेल के दिनों का एक ऐसा अनुभव साझा किया है जो public के सामने एक नई चर्चा खोल रहा है। उन्होंने उदयपुर सेंट्रल जेल में बंद रहते हुए एक भयानक स्वास्थ्य संकट का वर्णन किया, जब तेज बुखार और कंपकंपी के बीच भी कोई तत्काल response नहीं मिली। 7 दिसंबर, 2025 को धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तार किए गए विक्रम और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को फरवरी 2026 में जमानत मिल गई, लेकिन उनके जेल जीवन की कहानी अब दर्शकों को गहराई से छू रही है।

एक रात बैरक नंबर 10 में उनकी नींद बुखार से खुली। चार कंबल ओढ़ने के बावजूद ठंड नहीं गई। साथी कैदियों ने मदद की कोशिश की, लेकिन जेल के hospital में थर्मामीटर तक नहीं था। डॉक्टर ने ऑक्सीजन स्तर देखकर कहा कि वे ठीक हैं। विक्रम ने बताया कि उन्हें ऑटोइम्यून बीमारी है और बुखार उनके लिए खतरनाक हो सकता है। फिर भी, उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हुई।

उन्होंने बताया कि पहले पुलिस एक वीआईपी की सुरक्षा में व्यस्त थी, फिर आदिवासी मेले की तैयारी में। वे बैरक में दिन-रात इंतजार करते रहे। इस दौरान उन्होंने खाने से तेल और नमक हटा दिया, plenty पानी पिया और देवी की तस्वीर के सामने प्रार्थना करने लगे। उन्होंने कहा, 'मैं यहां मरना नहीं चाहता। मेरे बच्चों, पत्नी और 90 साल के पिता को मुझे जरूरत है।'

धीरे-धीरे उन्हें आराम मिलने लगा। बुखार कम हुआ, दर्द में छुटकारा मिला। उन्होंने देवी को धन्यवाद दिया और कहा कि चमत्कार सिर्फ उन्हीं को दिखते हैं जिन्हें उनकी need होती है। जब बाद में उन्होंने एक अधिकारी से पूछा कि आपात स्थिति में क्या होता, तो जवाब आया—'हम आपको जेल गार्ड्स के साथ भेज देते।' विक्रम ने कहा, 'तो फिर शुरू से क्यों नहीं भेजा?'

इस खुलासे ने न सिर्फ उनके प्रशंसकों को झकझोरा है, बल्कि आम जनता में जेल प्रणाली के प्रति भी concern बढ़ाई है। विक्रम के शब्दों में छिपा आध्यात्मिक विश्वास और प्रशासनिक उपेक्षा का ताना एक ऐसी कहानी बन गया है जो फिल्म जगत से आगे बढ़कर सामाजिक वार्तालाप का हिस्सा बन रही है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • अरुण_देसाई

    इतनी बड़ी personality होने के बावजूद कोई सहायता न मिलना दिखाता है कि जेल में सभी के लिए समान व्यवहार होता है।

  • रिया_मुंबई

    उनकी प्रार्थना का जवाब मिलना या न मिलना धार्मिक मान्यता है, लेकिन जेल प्रशासन की उदासीनता एक serious मुद्दा है।

  • सुमन_23

    मैं भी एक्सियल स्पोंडिलआर्थराइटिस से जूझ रही हूं। बुखार ऐसे मरीजों के लिए वाकई खतरनाक होता है।

  • नीरज_बोला

    अधिकारी का जवाब सुनकर लगता है कि वे एक emergency स्थिति को भी नहीं लेते गंभीरता से।

  • माया_जी

    जब तक खुद को खतरे में नहीं देखते, तब तक भगवान पर विश्वास नहीं आता। विक्रम के इस change ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया।

  • साहिल_एनटी

    क्या जेल में डॉक्टर्स को नहीं पता कि ऑटोइम्यून बीमारी वाले मरीजों को तुरंत ध्यान देना चाहिए?

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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