वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर विस्फोट: 14 मजदूरों की मौत, सुरक्षा मानकों पर सवाल
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार को भीषण बॉयलर विस्फोट हो गया, जिसमें 14 मजदूरों की मौत हो गई और 30 से अधिक घायल हुए। विस्फोट इतना जोरदार था कि प्लांट परिसर में आग और घना धुआं फैल गया, जिससे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के क्षेत्र में भी लोगों ने धमाके की आवाज सुनी और तुरंत बचाव दलों को सूचना दी गई।
प्रशासन की ओर से घटनास्थल पर लावारिस जल्दी बचाव कार्य शुरू किया गया। rescue teams ने घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया। कई मजदूरों की हालत गंभीर है और उनका इलाज चल रहा है। पुलिस अधीक्षक प्रफुल ठाकुर के अनुसार, बॉयलर के ट्यूब फटने की वजह से यह हादसा हुआ। कुछ मजदूर अभी भी प्लांट परिसर में फंसे होने की आशंका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुर्घटना को "बेहद दुखद" बताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति condolences किया। उन्होंने घोषणा की कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि घायलों को 50 हजार रुपये मिलेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी घटना पर deep sorrow व्यक्त किया और इसे "हृदय विदारक" कहा।
वेदांता पावर प्लांट के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि घटना बॉयलर यूनिट में हुई, जिसका संचालन और रखरखाव सब-कॉन्ट्रैक्टर NGSL के कर्मचारी कर रहे थे। कंपनी ने full support का आश्वासन दिया और चिकित्सा टीमों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने की बात कही। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अब वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच कर रही है।
इस दुर्घटना ने एक बार फिर industrial safety के मुद्दे को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों के उपचार और राहत कार्यों पर है, लेकिन लापरवाही के आरोपों के बीच जनता में public anger भी बढ़ रहा है।
मेरा भाई भी उस प्लांट में काम करता है। जब उसने फोन किया तो बस इतना कहा कि explosion धमाका इतना तेज था कि वो जमीन पर गिर गया।
सरकार हमेशा बाद में राहत देती है, लेकिन safety rules सुरक्षा नियमों को पहले क्यों नहीं लागू करती? ये पैसे से ज्यादा जान मांग रहे हैं।
कंपनी ने जल्दी से public statement बयान तो जारी कर दिया, लेकिन ये NGSL वाले कौन हैं? जवाबदेही कहां जाती है?
इतनी मौतें हो गईं और अभी भी कुछ लोग फंसे हैं। बचाव कार्य quickly तेजी से क्यों नहीं हो रहा?
बॉयलर फटना तकनीकी खराबी नहीं होती, ये maintenance failure रखरखाव में चूक है। कितनी बार ऐसा होगा जब तक हम ठोस नियम नहीं बनाते?
मेरे पिता भी बिजली घर में काम करते थे। वो कहते थे कि दबाव बहुत होता है, लेकिन worker safety मजदूर सुरक्षा के लिए कोई नहीं सुनता।