भरतपुर: अविनाश गहलोत ने अशोक गहलोत के बयान पर किया पलटवार, कहा-ट्विटर मास्टर बन गए हैं
भरतपुर में राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ गया है, जहाँ सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान के जवाब में तीखी criticism की है। मंत्री ने कहा कि पूर्व सीएम अब सिर्फ ट्विटर-फेसबुक मास्टर बन गए हैं, जो बिना तथ्यों के मीडिया में public statements करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कौन उनका सलाहकार है, और कहा कि शायद उन्हें adviser बदलने की जरूरत है।
अविनाश गहलोत ने दावा किया कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान सामाजिक पेंशन के भुगतान में 5 से 6 महीने की delay होती थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे केवल 1 से 2 महीने तक सीमित कर दिया है। पेंशन बिल फरवरी और मार्च के लिए पहले ही तैयार हो चुके हैं, और अब सभी लाभार्थियों को एक साथ payment मिल जाएगा।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछली सरकार की किसी भी योजना को नहीं रोका है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर तर्कहीन attack करने का आरोप लगाया और कहा कि वे एक भी उदाहरण नहीं दे पा रहे हैं जहाँ कोई योजना बंद की गई हो। तथ्य के बजाय भावनाओं पर आधारित बयान देकर वे सिर्फ मीडिया में ध्यान खींचना चाहते हैं।
उन्होंने पुरानी सरकार के दौरान पेपर लीक जैसे scandals को याद दिलाया, जहाँ कई अधिकारी जेल गए थे। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि नई सरकार के समय 350 परीक्षाएं हुईं और एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार बदली है, vision बदला है, और इसीलिए राजस्थान में change दिख रहा है।
अंत में, उन्होंने अप्रैल 21 को होने वाले प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में रिफाइनरी के उद्घाटन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इससे 25,000 नौजवानों को employment मिलेगा और राज्य को प्रति वर्ष 8 से 9 हजार करोड़ रुपये की revenue होगी। उनका तर्क है कि विकास के ये कदम बिना रुकावट के आगे बढ़ रहे हैं।
सच तो ये है कि पेंशन का delay इंतजार बहुत तकलीफ देता था। अब अगर वाकई 1-2 महीने में मिलने लगे, तो ये बड़ी राहत है।
ट्विटर मास्टर वाली बात पर हंसी आ गई, लेकिन दोनों तरफ से सिर्फ blame game आरोप है। काम दिखे, तभी भरोसा बनेगा।
ये सब बातें तो चलती रहती हैं। असली सवाल ये है कि आखिर कब तक public trust जन भरोसा इन बयानों पर बनाए रखेंगे?
मंत्री जी ने रिफाइनरी का जिक्र किया, लेकिन क्या local impact स्थानीय युवा वाकई नौकरियों का लाभ उठा पाएंगे? बाहर से लोग न आ जाएं?
एक समय में पेपर लीक होता था, अब नहीं होता — ये अच्छी बात है। लेकिन क्या transparency पारदर्शिता बरकरार है? ये भी देखना चाहिए।
जब तक नीति का क्रियान्वयन सड़क पर नहीं दिखेगा, तब तक ये सब बयानबाजी ही लगेगी।