शतक जड़ते बाबर: क्या कप्तानी की वापसी होगी?
क्रिकेट के मैदान पर जब century की बात आती है, तो बाबर आजम का नाम अक्सर सबसे आगे होता है। इस पाकिस्तानी स्टार ने पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) के इस सीजन में form की राह पर लौटते हुए दो शतक जड़ दिए हैं, और अब उनकी नजरें सिर्फ फाइनल पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों पर भी टिकी हैं। शनिवार को एक मीडिया संवाद में उन्होंने साफ किया कि कप्तानी के प्रस्ताव को वह पूरी तरह नहीं ठुकराते — खासकर जब बात team के हित की हो। उनके शब्दों में, "अगर भविष्य में ऐसी स्थिति आती है तो मैं हमेशा पाकिस्तान क्रिकेट के हित में ही फैसला लूंगा।"
बाबर ने 2020 से 2023 तक पाकिस्तान की सभी प्रारूपों में नेतृत्व किया, लेकिन वनडे वर्ल्ड कप के बाद उन्होंने जिम्मेदारी छोड़ दी। 2024 के T20 वर्ल्ड कप में उन्हें फिर से नियुक्त किया गया, लेकिन टीम समूह चरण में ही बाहर हो गई, और उन्हें कप्तान से हटा दिया गया। अब, PSL में उनका शानदार performance चर्चा का विषय बना है। उन्होंने पेशावर ज़ल्मी को final तक पहुंचाया, जहां वे मार्नस लाबुशेन की हैदराबाद किंग्समेन के खिलाफ खेलेंगे।
उनकी आलोचना भी होती रही है, चाहे वह good खेल रहे हों या नहीं। लेकिन बाबर का कहना है कि वह इससे प्रभावित नहीं होते। "मुझे अपने फैंस और समर्थकों से बहुत आत्मविश्वास मिलता है," उन्होंने कहा। रविवार के फाइनल को लेकर वह excited हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जो रणनीति उन्होंने अब तक सही ढंग से लागू की है, उसे आखिरी मैच में भी बरकरार रखेंगे।
बाबर ने यह भी नोट किया कि PSL ने कई उभरती प्रतिभाओं को मंच दिया है। ऐसे खिलाड़ियों को proper तरीके से तैयार करने की जरूरत है ताकि भविष्य में राष्ट्रीय टीम के लिए मजबूत पूल बन सके। जब उनसे सीधे यह पूछा गया कि क्या वह हैदराबाद किंग्समेन के खिलाफ चिंतित हैं, तो उन्होंने कहा कि हर टीम की अपनी रणनीति होती है, लेकिन वह अपने गेम पर ध्यान देना चाहते हैं।
बाबर अगर कप्तानी लौटते हैं, तो टीम में स्थिरता आएगी। लेकिन क्या PCB उन पर भरोसा करेगा?
PSL में फॉर्म अच्छा है, लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर अलग चुनौतियां होती हैं।
हर बार फाइनल में 'हमें आत्मविश्वास मिलता है' वाली बात क्यों? जीत दिखाओ, बयानबाजी बंद करो।
उभरती प्रतिभाओं को मौका मिलना चाहिए, लेकिन अनुभव भी तो मायने रखता है। बाबर के साथ संतुलन हो सकता है।
2024 वर्ल्ड कप वाली गलतियां दोहराना नहीं चाहिए। कप्तानी सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, नेतृत्व शैली पर भी आधारित होनी चाहिए।
दो शतक जमाना आसान नहीं होता। यह लगातारपन देखकर अच्छा लगा।
PSL फाइनल का इंतजार है। चाहे कप्तानी क्यों न हो, बाबर का बल्ला बोलेगा।
आलोचना तो हर कप्तान को मिलती है। असली बात ये है कि क्या वह दबाव में फैसले ले सकता है? दबाव में खेलना ही असली टेस्ट होता है।