1500 किलो एक्सपायर घी जब्त: सेहत के साथ खिलवाड़ या सिस्टम की चूक?
कल्पना कीजिए, आपके रसोईघर के तेल में दो साल पुराना घी मिला हो — जो खराब हो चुका है, लेकिन फिर भी बाजार में बिकने को तैयार है। लुधियाना में यही सच था, जहां स्वास्थ्य विभाग ने गिल चौक के पास एक दुकान पर raid और करीब 1500 किलोग्राम संदिग्ध देसी घी जब्त किया। यह घी दूसरे राज्य से लाया गया था और अब लुधियाना के अलग-अलग area में बांटे जाने की तैयारी थी। लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि इसमें से कुछ सामान तो पहले ही 2024 में एक्सपायर हो चुका था।
अधिकारियों को गुप्त सूचना मिली थी कि एक बड़ी खेप जल्द ही बाजार में उतारी जाएगी। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगेश गोयल और जतिंदर विर्क की टीम ने अचानक छापेमारी की। वहां के premise में न केवल घी के भारी भंडार थे, बल्कि एक्सपायर हुए प्रोडक्ट्स भी धड़ल्ले से रखे गए थे। कोई नहीं जानता कि कितने लोग इस तरह के खाद्य पदार्थों को खाकर सेहत के साथ खिलवाड़ कर चुके थे।
टीम ने सामान की जांच के लिए चार नमूने लैब भेजे — दो देसी घी के, एक एक्सपायर हुए skimmed का, और एक मल्टी-सोर्स कुकिंग ऑयल का। ऐसे उत्पाद जो सुरक्षित नहीं होते, वे न केवल खराब स्वाद देते हैं, बल्कि शरीर में संक्रमण का खतरा भी बढ़ाते हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनता की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ strict कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा के महत्व को उजागर किया है। एक्सपायर हुए उत्पादों को बेचना सिर्फ ठगी नहीं, बल्कि एक जानलेवा जोखिम है। लोगों को अपने kitchen के तेल और दूध के सामान की तारीख जांचने की आदत डालनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि वे गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन नागरिकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है।
यह कार्रवाई तो एक दुकान तक सीमित रही, लेकिन सवाल यह है कि ऐसी और कितनी दुकानें होंगी जहां खराब सामान बिक रहा हो? सख्त निगरानी के बावजूद, मिलावटखोर अपने तरीकों में निरंतर नई चालें चलते हैं। इसलिए, नियमों का उल्लंघन न सिर्फ दंडनीय अपराध है, बल्कि एक नैतिक बेइमानी भी है। आम आदमी की थाली को सुरक्षित रखना एक संयुक्त जिम्मेदारी है।
अगर इतना बड़ा सामान एक दुकान में मिल सकता है, तो शहर के अन्य market बाजार में क्या हालात होंगे?
हर कोई असली देसी घी चाहता है, लेकिन क्या कोई सोचता है कि उसकी safety सुरक्षा कौन सुनिश्चित कर रहा है?
अधिकारी तो आए, छापा मारा, लेकिन क्या लंबे समय तक निगरानी रहेगी? वैसे भी, क्या एक्सपायर घी से तुरंत बीमारी होती है?
मैं हर चीज की एक्सपायरी डेट देखती हूँ, लेकिन गांव में बहुत से लोग ऐसा नहीं कर पाते। इसलिए awareness जागरूकता फैलानी चाहिए।
गिल चौक तो बहुत व्यस्त जगह है। वहां ऐसी दुकान कैसे चल रही थी?
सैंपल लैब भेजे गए, अब रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी। लेकिन क्या देरी से रिपोर्ट आने पर भी कोई penalty जुर्माना होगा?
अगर सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा, तो फिर इतना खराब घी वहां कैसे पहुंचा?