अगले 24 घंटे और... क्या फिर शुरू होगा युद्ध? नेतन्याहू बोले- ईरान में हमारा काम अभी बाकी, ट्रंप ने भी दी चेतावनी
मध्य पूर्व एक बार फिर उस सीमा पर खड़ा है, जहाँ peace और war के बीच सिर्फ 24 घंटे का फासला बचा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, tensions को और तेज कर रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताज़ा बयानों ने चिंता बढ़ा दी है कि आगामी दिन decisive हो सकते हैं। दो हफ्ते का सीजफायर बुधवार, 22 अप्रैल को शाम को खत्म हो रहा है — यानी भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह तड़के इसकी अंतिम सीमा है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अगर तेहरान के साथ समझौता नहीं होता, तो सीजफायर को आगे बढ़ाने की chance लगभग खत्म है। उन्होंने चेतावनी दी कि "अगर कोई निर्णायक समाधान नहीं निकलता, तो बहुत सारे बम फटने लगेंगे।" यह warning सीधे ईरान के खिलाफ military action की ओर इशारा करती है। वहीं, नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ इजरायल का ऑपरेशन अभी पूरा नहीं हुआ है। "ईरान में हमारा work अभी बाकी है," उन्होंने कहा, जिसे संभावित सैन्य योजना का संकेत माना जा रहा है।
इस बीच, अमेरिका ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश करते हुए seized कर लिया। ईरान की सेना ने इसे "सशस्त्र समुद्री डकैती" बताया और तुरंत प्रतिक्रिया की चेतावनी दी। ईरानी सरकारी मीडिया ने एक सैन्य प्रवक्ता के हवाले से कहा कि सशस्त्र बल जल्द ही इस act का बदला लेंगे।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने ट्रंप पर धमकियों के जरिए कूटनीति को बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान pressure में आकर कोई वार्ता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "वाशिंगटन बातचीत को आत्मसमर्पण की मेज में बदलना चाहता है।" उन्होंने यह भी कहा कि अगर तनाव बढ़ता है, तो ईरान युद्ध के मैदान में new cards खोलने के लिए तैयार है।
इस आशंका के बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को पाकिस्तान रवाना होने की योजना है, जहाँ बातचीत के दूसरे दौर की संभावना है। लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने खंडन किया है कि अभी कोई वार्ता नहीं हो रही। यह contradiction अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता को बढ़ा रहा है। क्या अगले 24 घंटे शांति या तबाही लाएंगे? यह सवाल दुनिया के कई हिस्सों में चिंता का विषय बना हुआ है।
क्या वाकई अगले 24 घंटे इतने critical महत्वपूर्ण हैं? लगता है हर बार यही बात दोहराई जाती है।
ट्रंप की धमकी के बाद भी ईरान ने पीछे हटने से इनकार किया है। वो stand firm मजबूती से खड़ा रहना चाहता है।
इतनी बड़ी crisis संकट के बीच बातचीत की कोई ठोस उम्मीद नहीं दिख रही।
अमेरिका का जहाज जब्त करना एक सीधा provocation उकसावा था। ईरान क्या जवाब देगा?
नेतन्याहू का बयान साफ है — वो अपना mission मिशन पूरा करने तक पीछे नहीं हटेंगे।
क्या वाकई युद्ध से कोई benefit लाभ होगा? हर युद्ध में तो आम लोग ही भुगतते हैं।
गालिबाफ का 'नए पत्ते खोलने' का बयान बहुत telling बोलता हुआ है। वो कुछ ऐसा कर सकते हैं जो हम नहीं समझ पा रहे।
अगर बातचीत विफल होती है, तो human cost मानवीय लागत कितनी बढ़ेगी? यही सबसे बड़ी चिंता है।