राहुल गांधी भगवान नहीं, अपना पासपोर्ट दिखाएं: पवन खेड़ा की जमानत रद्द होने पर सरमा का हमला
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर सीधा attack किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी not god हैं और उन्हें भी अपना पासपोर्ट मीडिया के सामने दिखाना चाहिए। सरमा ने public demand अपने और अपनी पत्नी के पासपोर्ट रखने की offer करते हुए कहा कि अगर वे जवाबदेह हो सकते हैं, तो राहुल गांधी क्यों नहीं?
यह tension पवन खेड़ा द्वारा 5 अप्रैल को लगाए गए आरोपों से शुरू हुआ, जब उन्होंने सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां पर three passports रखने और दुबई-अमेरिका में property होने का दावा किया। इसके बाद रिंकी ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद असम पुलिस ने खेड़ा के दिल्ली आवास पर raid मारा।
सरमा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि तेलंगाना हाईकोर्ट पवन खेड़ा को interim bail नहीं दे सकता क्योंकि वह वहां के निवासी नहीं हैं। उन्होंने कानून की process पर विश्वास जताया और कहा कि कानून का राज हर किसी पर लागू होता है, चाहे वह कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो।
यह घटनाक्रम राजनीतिक accountability के सवाल को तेज कर रहा है। एक ओर पार्टी नेता निजी जीवन पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर सत्तारूढ़ नेता उसी tool को उलटकर उपयोग कर रहे हैं। पासपोर्ट का मुद्दा अब केवल विदेश यात्रा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक symbol बन गया है — जनता के सामने transparency की मांग का।
इस बहस में सवाल यह भी है कि क्या न्यायिक संस्थान का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए हो रहा है। जब आरोप-प्रत्यारोप के बीच bail जैसे गंभीर मुद्दे उठते हैं, तो public trust पर असर पड़ता है। राजनीति में personal attack का दौर जारी है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि अब जनता भी जवाब मांग रही है।
अगर राहुल गांधी international travel अंतरराष्ट्रीय यात्रा करते हैं, तो उन्हें disclose खुलासा करने में क्या बुराई है? जनता के पैसे पर चलने वाले नेता को transparency पारदर्शिता दिखानी चाहिए।
सरमा जी ने सही कहा, law applies कानून सब पर लागू होना चाहिए। लेकिन क्या असम पुलिस का raid छापा वाकई कानून के तहत था या सिर्फ political message राजनीतिक संदेश?
पवन खेड़ा की bail cancel जमानत रद्द होना चिंता की बात है। क्या न्यायिक स्वतंत्रता अब राजनीति के दबाव में है?
दोनों तरफ से personal attack व्यक्तिगत हमले चल रहे हैं। public interest लोक हित में नहीं, बस जीतने के लिए।
मैं भी अपना पासपोर्ट दिखाने को तैयार हूं। लेकिन real issue असली मुद्दा तो यह है कि क्या इन आरोपों में evidence सबूत है?
मीडिया इसे drama ड्रामा बना रहा है। लेकिन public scrutiny जन जांच जरूरी है, चाहे कोई भगवान हो या नेता।