इत्तेफाक या साजिश? अमेरिका में 11 वैज्ञानिकों की रहस्यमय मौत और गायब होने के मामले ने पकड़ा तूल, जांच हुई तेज
अमेरिका में गुजरे दो सालों के भीतर 11 वैज्ञानिकों की रहस्यमय मौत या गायब होने के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इनमें अलबामा की रहने वाली शोधकर्ता एमी एस्क्रिज़ की 2022 में हुई मृत्यु भी शामिल है। उनके अलावा अमेरिकी सेना, परमाणु अनुसंधान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े अन्य वैज्ञानिक भी इस सूची में आते हैं, जिनकी मौतें अजीब परिस्थितियों में हुईं या वे अचानक गायब हो गए। mystery इतना गहरा है कि लोग अब यह सवाल कर रहे हैं कि क्या यह सब सिर्फ coincidence है या फिर कोई बड़ी plot चल रही है।
इस मुद्दे ने राष्ट्रीय स्तर पर इतना ध्यान खींचा है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसकी गंभीरता को स्वीकार करते हुए एक उच्च-स्तरीय बैठक की। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और अगले कुछ दिनों में answers मिलने की उम्मीद है। public के प्रति जवाबदेही दिखाते हुए उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि यह सब महज एक इत्तेफाक हो, लेकिन हमें पता लगाना होगा कि वास्तव में क्या हुआ।"
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने भी जांच में पूरी transparency का वादा किया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले की गहन समीक्षा कर रही है और सभी एजेंसियों, विशेषकर एफबीआई के साथ cooperation कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन सभी घटनाओं के बीच कोई connection है या नहीं।
वैज्ञानिक समुदाय में इस घटनाक्रम के बाद fear का माहौल है। कई शोधकर्ता इस बात से परेशान हैं कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं, तो यह वैज्ञानिक अनुसंधान के freedom पर भी गहरा impact डाल सकता है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषदों ने भी अमेरिकी सरकार से इस मामले में पूरी clarity बरतने की मांग की है।
इस घटना के पीछे की वास्तविकता अभी तक अज्ञात है, लेकिन जांच तेज कर दी गई है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि जैसे ही कोई नई evidence मिलेगी, उसे तुरंत जनता के साथ share किया जाएगा। यह मामला न केवल अमेरिका के लिए बल्कि वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी एक चुनौती बन गया है।
एक एक करके वैज्ञानिक मर रहे हैं या गायब हो रहे हैं — यह सिर्फ coincidence इत्तेफाक नहीं हो सकता। किसी को इनके research शोध से खतरा महसूस हो रहा होगा।
अगर सरकार वाकई गंभीर है, तो जांच में transparency पारदर्शिता दिखाए। वरना लोग और भी ज्यादा suspicious संदेह करेंगे।
मैं एक शोधकर्ता हूं और इस खबर ने मुझे fear डरा दिया। क्या हमारी safety सुरक्षा भी खतरे में है?
इन वैज्ञानिकों के काम से जुड़ी जानकारी classified गुप्त थी। क्या कोई विदेशी एजेंसी इसके पीछे है?
ट्रंप को इस पर बैठक करनी पड़ी? तो फिर बाइडेन प्रशासन क्या कर रहा था इस बीच? राजनीति में blame game आरोप-प्रत्यारोप तो शुरू होगा ही।
सच क्या है, यह तो पता चलेगा, लेकिन सरकार को public जनता को update अपडेट करना चाहिए। चुप्पी सिर्फ अफवाहें बढ़ाती है।