विश्व स्वास्थ्य दिवस: ये 5 बीमारियां आज भी बनी हुई हैं बड़ी चुनौती, जानें क्यों नहीं मिला इलाज

आज वर्ल्ड हेल्थ डे है, और इस मौके पर एक बड़ी सच्चाई यह है कि medical science ने जितना भी विकास किया है, कुछ बीमारियां अब भी ऐसी हैं जिनका पूरा treatment संभव नहीं हो पाया है। इनके symptoms को तो कम किया या controlled किया जा सकता है, लेकिन एक बार हो जाने पर ये जीवनभर रहती हैं। दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, ऐसी कई बीमारियां हैं जिन पर वैज्ञानिक अभी भी research कर रहे हैं।

सबसे पहले बात करते हैं पार्किंसंस की। यह एक nervous system की बीमारी है जो उम्र बढ़ने के साथ विकसित होती है। मरीज को चलने-फिरने में दिक्कत होती है, कभी-कभी सही तरह से speech में भी असुविधा होती है। दवाओं और physiotherapy से लक्षणों को सुधारा जा सकता है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी इलाज नहीं मिला है।

इसी तरह, एचआईवी/एड्स आज भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। एचआईवी शरीर के immune system को कमजोर करता है। एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की मदद से मरीज लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकते हैं, और वायरस को निष्क्रिय किया जा सकता है। लेकिन एक बार एड्स विकसित होने पर, उसका कोई इलाज नहीं है।

डायबिटीज के दोनों प्रकार—टाइप 1 और टाइप 2—का भी स्थायी इलाज नहीं है। टाइप 1 एक autoimmune disease है, जहां शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। मरीज को जीवनभर insulin की आवश्यकता होती है। टाइप 2 को जीवनशैली के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन इसका पूरा इलाज नहीं है।

इसके अलावा, autoimmune diseases जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस और सोरायसिस भी अब तक ठीक नहीं हो पाई हैं। मल्टीपल स्केलेरोसिस भी ऐसी ही बीमारी है जिसमें इम्यून सिस्टम नसों को नुकसान पहुंचाता है। इनके लक्षणों को कम किया जा सकता है, लेकिन permanent cure नहीं है।

इन बीमारियों से prevention पूरी तरह संभव नहीं है, लेकिन healthy lifestyle , नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह से जोखिम कम किया जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि लक्षणों को जल्दी पहचानकर उपचार शुरू किया जाए, ताकि जीवन की quality बनी रहे।

टिप्पणियाँ 6

  • अर्जुनजी

    ये सुनकर दुख होता है कि आज भी ऐसी बीमारियां हैं जिनका cure नहीं है। लेकिन कम से कम लक्षणों को manage किया जा सकता है।

  • मीरा_आहूजा

    मेरे पिता को पार्किंसंस है। दवाएं और व्यायाम ने उनकी mobility में सुधार किया है। लेकिन हर दिन एक challenge है।

  • डॉ_वर्मा

    एचआईवी के बारे में लोगों में अभी भी misconception हैं। ART के जरिए वायरस को इतना कम किया जा सकता है कि वह transmission नहीं करता।

  • राजेश_पांडे

    क्या vaccine के जरिए इन बीमारियों को रोका जा सकता है? या क्या future research में उम्मीद है?

  • शिल्पी

    मैंने टाइप 2 डायबिटीज को lifestyle change से कंट्रोल किया है। यह संभव है, लेकिन discipline चाहिए।

  • संजयकुमार

    इम्यून सिस्टम खुद को ही क्यों अटैक करता है—ये सवाल आज भी medical science के लिए एक mystery है।