क्या ईरान की गर्मी ट्रंप को नेपोलियन और हिटलर जैसी हार दिला देगी?
क्या डोनाल्ड ट्रंप इतिहास की उसी deadly mistake को दोहराएंगे जिसने नेपोलियन और हिटलर को नष्ट कर दिया था? ईरान के खिलाफ military threats के बीच, वहां की झुलसती हुई गर्मी एक अदृश्य लेकिन घातक barrier बनकर उभर रही है। 53°C तक पहुंचने वाला तापमान न सिर्फ अमेरिकी सैनिकों की endurance को चुनौती देगा, बल्कि उनके आधुनिक हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक्स को भी cripple कर सकता है। यदि समय रहते हमला नहीं किया गया, तो nature का यह अदृश्य किला सुपरपावर की हार लिख सकता है।
इतिहास के पन्नों में, युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते—मौसम भी एक silent player होता है। नेपोलियन की 6 लाख की सेना रूस की brutal winter में बर्बाद हो गई। हिटलर ने वही गलती दोहराई—जर्मन tanks जम गए, हथियार ठंड में ठप हो गए। इसी तरह, 1761 में पानीपत के मैदान में मराठों की defeat में उत्तर भारत की कड़ाके की सर्दी ने अहम भूमिका निभाई। अब ईरान की उबलती गर्मी अमेरिका के लिए वही threat बन सकती है जो गर्मियों में आधुनिक युद्ध को लगभग असंभव बना देगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस वक्त दुनिया का सबसे खतरनाक flashpoint है। ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिका अब होर्मुज में आने-जाने वाले सभी जहाजों की full blockade करेगा। उनका आरोप है कि ईरान nuclear program बंद नहीं कर रहा, और यदि अमेरिकी जहाजों पर हमला हुआ, तो ईरान को 'तबाह' कर दिया जाएगा। ईरान ने जवाब में कहा है कि जो भी जहाज होर्मुज से गुजरेगा, उसे टोल देना होगा। वे खुद को in control बता रहे हैं और अमेरिका से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
लेकिन दूसरा, अधिक खतरनाक मोर्चा जमीनी हमले का है। अप्रैल के अंत तक, ईरान के अहवाज और अबादान जैसे क्षेत्रों में तापमान 50°C के पार पहुंच जाता है। अमेरिकी सैनिक, जो 50 पाउंड के gear और बुलेटप्रूफ जैकेट में घिरे होंगे, शरीर का तापमान regulate करने में असमर्थ हो जाएंगे। गर्मी में युद्धक वाहनों के अंदर का तापमान 80°C तक पहुंच सकता है—इतना कि electronics फेल हो जाएं, sensors बंद हो जाएं, और रबर के पुर्जे पिघल जाएं। यहां तक कि मिसाइलों और drones के इंजन भी ओवरहीट होकर क्रैश हो सकते हैं।
इतिहास बार-बार चेतावनी देता है: जो सेना कैलेंडर नहीं पढ़ती, वह युद्ध हार जाती है। कुबलई खान के मंगोल बेड़े को 13वीं सदी में जापान के divine wind ने तबाह कर दिया था। आज, ईरान का रेगिस्तान अमेरिकी सेना के लिए वैसी ही graveyard बन सकता है। ट्रंप के पास समय तेजी से running out हो रहा है। प्रत्येक दिन जमीनी हमले की success की संभावना को घटा रहा है। क्या वह इतिहास की सीख नहीं पढ़ पाएंगे? या फिर superpower भी मौसम के आगे घुटने टेकेगा?
अमेरिकी जहाजों की नाकाबंदी का मतलब है वैश्विक तेल कीमतों में भूचाल। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था झकझोर सकता है।
ट्रंप कहते हैं 'ईरान तबाह', लेकिन खुद उस गर्मी में जो heatstroke ऊष्माघात होगा, वही अमेरिकी सैनिकों को तबाह कर देगा।
मौसम निष्पक्ष होता है। लेकिन वह जो तैयारी करता है, वही जीतता है। क्या अमेरिका ईरान की गर्मी के लिए proper training उचित प्रशिक्षण कर चुका है?
रूस की सर्दी ने हिटलर को रोका, अब ईरान की गर्मी ट्रंप को रोकेगी। इतिहास दोहराया जा रहा है। प्रकृति हमेशा जीतती है।
अमेरिका के पास सब कुछ है, लेकिन क्या वे जानते हैं कि 53°C में एक bulletproof vest गोलीरोधी बनियान पहनना भी जानलेवा हो सकता है?
क्या ईरान वाकई में समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है? और अगर हां, तो क्या अमेरिका के mine sweepers माइनस्वीपर्स उन्हें ढूंढ पाएंगे?