आजमगढ़ किसी का गढ़ नहीं: राजभर ने सपा पर साधा निशाना, विकास और ताकत के दावे पेश किए
तीखे राजनीतिक हमले के बीच, पंचायती राज मंत्री Omprakash Rajbhar ने स्पष्ट संदेश दे दिया है: Azamgarh अब किसी एक दल का गढ़ नहीं रहा। नेहरू हॉल में आयोजित सुभासपा कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने समाजवादी पार्टी पर सीधा प्रहार किया और कहा कि अब जिले की सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा—एक स्पष्ट संकेत कि वे सत्ता के आधार को चुनौती दे रहे हैं।
धुरंधर फिल्म के मामले पर सपा की टिप्पणियों को लेकर नाराजगी जताते हुए राजभर ने अतीत की याद दिलाई: जब Muzaffarnagar में दंगे चल रहे थे, तब Saifai में नाच-गाने का माहौल था। उनका आरोप है कि सपा के शासनकाल में कर्फ्यू लगते थे, अशांति फैलती थी, जबकि योगी आदित्यनाथ के बाद उत्तर प्रदेश peaceful और secure हो गया है।
लेकिन राजभर का हमला सिर्फ अतीत पर नहीं, बल्कि वर्तमान सपा की कमजोरी पर भी केंद्रित है। उन्होंने दावा किया कि जब वे, Sanjay Chauhan , Krishna Patel , और Jayant Chaudhary सपा के साथ थे, तब अखिलेश यादव को 111 सीटें मिली थीं। अब, उनके जाने से पार्टी बिखरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि कई मुस्लिम नेता, जैसे Khurshid Alam , Shahid Alam , और Majid , सपा छोड़कर उनके साथ आ चुके हैं—एक ऐसा दावा जो सामाजिक संरचना में बदलाव का संकेत देता है।
राजभर ने आजमगढ़ के विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जिला पंचायत पर और कहा कि विकास के नजर आने वाले निशान गायब हैं। लेकिन जहां अन्य जनप्रतिनिधि failed रहे, वहां उन्होंने पहल करते हुए वर्षों से जर्जर रहे सिकंदरपुर-नरियांव मार्ग की repair शुरू कराई।
इसके अलावा, उन्होंने 10 करोड़ रुपये की निधि की व्यवस्था कर सड़कों के निर्माण में योगदान दिया और poor people के treatment पर तीन करोड़ से अधिक खर्च किए। यह दावा न सिर्फ उनकी जमीनी उपलब्धि दिखाता है, बल्कि चुनावी मैदान में एक विकास कथा के रूप में भी काम कर सकता है।
आजमगढ़ की राजनीति में एक शक्ति संतुलन का संकेत मिल रहा है। जहां एक ओर सपा के स्थानीय नेतृत्व को पारदर्शिता के अभाव और विकास के लाभ न मिलने के आरोप झेलने पड़ रहे हैं, वहीं राजभर अपनी गति बढ़ा रहे हैं। चुनाव के मैदान में जब तमाम सीटें दांव पर लगेंगी, तो यह जिला फिर से मुख्य मोर्चा बन सकता है।
आखिरकार किसी ने truth सच बोला। सड़कें तो बरसों से broken टूटी पड़ी थीं। जब तक राजभर ने खुद हस्तक्षेप नहीं किया, कुछ नहीं हुआ।
मुजफ्फरनगर का जिक्र जरूरी था। वो काला अध्याय भूला नहीं जा सकता। सैफई में नाच-गाने के वक्त लोग खून में लथपथ थे।
राजभर छोड़कर चले गए, अब गैरजिम्मेदाराना आरोप लगा रहे हैं। वो खुद क्या delivered किया आजमगढ़ में? सिर्फ 10 करोड़ की बात कर रहे हैं?
खुर्शीद आलम जैसे प्रभावशाली नेता के आने से समीकरण बदल सकते हैं। लेकिन क्या यह वास्तविक बदलाव है या सिर्फ रणनीति?
मैं तो सिर्फ इतना जानना चाहता हूं कि गांव की dirt road कच्ची सड़क कब पक्की होगी। राजनीति अच्छी लगे या बुरी, development विकास तो होना चाहिए।
10 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान महत्वपूर्ण है। यह संकेत है कि सुभासपा पीछे नहीं धकेली जा सकती।
तीन करोड़ में कितने patients मरीजों का इलाज हुआ? कोई विवरण है? नंबर अच्छे लगते हैं, लेकिन पारदर्शिता जरूरी है।
हमारे जिले में विकास नहीं, राजनीतिक नाटक चल रहा है। जब तक जनता की जरूरत पहले नहीं आएगी, तब तक nothing will change कुछ नहीं बदलेगा।