अरुणाचल प्रदेश अवैध, वो जगह हमारी है; चीन ने भारत के खिलाफ किया दावा
चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को लेकर तनाव बढ़ा दिया है। उसके विदेश मंत्रालय ने इसे 'तथाकथित' region बताते हुए कहा है कि यह भारत द्वारा illegally established प्रदेश है। इस बयान के जरिए चीन ने अपने पुराने दावे को दोहराया है कि यह इलाका उसका है, जो जांगनान के नाम से जाना जाता है। यह मुद्दा सिर्फ नामकरण का नहीं, बल्कि territorial claim का भी है जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है।
चीन के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने स्पष्ट किया कि जांगनान चीन का own territory है और अरुणाचल प्रदेश को वैधता देने की उसकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन को इस क्षेत्र के स्थानों के naming rights हैं, जिसे वह स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करेगा। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब द्विपक्षीय bilateral relations कुछ स्थिरता की ओर बढ़ रहे थे।
इसके जवाब में भारत ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन के किसी भी symbolic move को खारिज करते हुए कहा कि भारत अपने क्षेत्रों के लिए 'काल्पनिक नाम' रखने के प्रयासों को कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदम दोनों देशों के बीच संबंधों को derail सकते हैं, जो हाल के महीनों में धीरे-धीरे सुधार की ओर बढ़ रहे थे।
यह विवाद नया नहीं है। चीन 2017 से लगातार अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों के लिए नए चीनी नाम publishing कर रहा है। भारत ने हर बार इसका strong objection किया है। जांगनान, जो अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है, चीन के अनुसार दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। यह भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है, खासकर जब चीन LAC के पास नए प्रशासनिक जिले बना रहा है।
हाल ही में शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र ने सेनलिंग काउंटी के गठन की घोषणा की, जो PoK और अफगानिस्तान के निकट है। भारत ने पहले भी हेआन और हेकांग काउंटी के गठन के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई थी, क्योंकि ये क्षेत्र लद्दाख के jurisdiction में आते हैं। यह स्पष्ट करता है कि चीन के प्रशासनिक कदम भारत के साथ सीमा विवाद को बढ़ावा देने वाले हैं, जो अब सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि प्रशासनिक दावे का भी मुद्दा बन चुका है।
हर बार यही दावा, हर बार नाम बदलने की कोशिश। लेकिन असली military presence सैन्य उपस्थिति तो हमारी है वहां।
चीन के लिए 'तथाकथित' शब्द का इस्तेमाल बस एक political tactic राजनीतिक चाल है। वो जानते हैं अरुणाचल हमारा है।
अगर वो नाम बदल सकते हैं, तो क्या हम जांगनान को अरुणाचल कहकर जवाब दे सकते हैं? symbolic response प्रतीकात्मक जवाब भी तो होना चाहिए।
बस बयानबाजी नहीं, हमें रणनीतिक संचार में मजबूत होना होगा। दुनिया को सच बताने की जरूरत है।
लद्दाख के बाद ये फिर से तनाव बढ़ा रहे हैं। चीन को लगता है हम झुक जाएंगे। never happen कभी नहीं होगा।
क्या इन administrative moves प्रशासनिक कदमों का कोई अंतरराष्ट्रीय कानून में वजन है? या बस दिखावा है?