मंगल ग्रह पर 50 साल से यह क्या रेंग रहा है? करोड़ों किलोमीटर दूर से आईं PHOTOS, लगातार बढ़ रहा काला साया!
मंगल ग्रह के उत्तरी गोलार्ध में स्थित एक विशाल काली shape पिछले 50 सालों से रेंग रही है, और वैज्ञानिकों के लिए यह एक बढ़ता mystery बनती जा रही है। यूटोपिया प्लैनिटिया नामक इस विशाल मैदान में स्थित यह काला patch , जो करीब 3,300 किलोमीटर चौड़ा है, धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ा रहा है। 1976 में नासा के वाइकिंग प्रोब ने इसकी पहली तस्वीर ली थी, और अब तक कई मिशनों ने इसकी निगरानी की है।
2024 में यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस ऑर्बिटर ने नई images जारी कीं, जिनके analysis से पता चला कि इस काले धब्बे की दक्षिणी सीमा कम से कम 320 किलोमीटर आगे खिसक गई है। यह अर्थ है कि यह dark क्षेत्र हर साल लगभग 6.5 किलोमीटर की rate से फैल रहा है। यह 22.5 करोड़ किलोमीटर दूर से मिला डेटा वैज्ञानिकों के लिए न सिर्फ एक surprise है, बल्कि एक नई खोज की ओर भी इशारा करता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस फैलाव के पीछे दो संभावित reasons हो सकते हैं। पहला यह कि मंगल की तेज धूल भरी winds प्राचीन ज्वालामुखी राख और चट्टानों को उड़ाकर ले जा रही हैं। दूसरा यह कि लाल धूल की परत जो काले इलाके को ढके हुए थी, हवा के कारण eroded है, और अब नीचे का काला हिस्सा स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यह इलाका ओलिविन और पाइरोक्सिन जैसी minerals चट्टानों से बना है, जो करोड़ों साल पहले के ज्वालामुखी विस्फोटों का नतीजा हैं।
यह क्षेत्र न केवल भूवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन की संभावना के लिहाज से भी दिलचस्प है। यहां की दरारें, जिन्हें 'ग्रेबेंस' कहा जाता है, प्राचीन टेक्टोनिक गतिविधि के संकेत देती हैं। और अधिक दिलचस्प बात यह है कि वैज्ञानिकों को संदेह है कि इस मैदान के नीचे बर्फ का एक विशाल reservoir छिपा हो सकता है। अगर यह सच साबित होता है, तो यह मंगल पर alien life के प्रमाण ढूंढने के लिए सबसे संभावित स्थल बन सकता है।
1976 में वाइकिंग 2 लैंडर ने इसी क्षेत्र में जैविक प्रयोग किए थे, और 2021 में चीन का झुरोंग रोवर भी यहीं उतरा था। उसके डेटा से पता चला कि यूटोपिया प्लैनिटिया एक बड़े ancient ocean से ढका हुआ था। वैज्ञानिकों ने तो इस महासागर के तटों का भी map बना लिया है। अभी तक इस रेंगते काले साये का कोई अंतिम explanation नहीं मिली है, लेकिन हर नई तस्वीर इस ग्रह के भूतकाल की एक नई कहानी सुनाती है।
हर साल 6.5 किमी की रफ्तार से? यह तो बेहद तेज है। क्या वाकई हवाएं इतना बड़ा change बदलाव ला सकती हैं?
ग्रेबेंस और टेक्टोनिक गतिविधि का मतलब है कि मंगल एक जीवित ग्रह था। यह बहुत fascinating रोमांचक है।
अगर बर्फ का भंडार मिल गया, तो क्या यह भविष्य में मानव बस्ती के लिए vital जीवनरेखा बन सकता है?
क्या यह सिर्फ धूल हटने का नतीजा है? फैलाव का दावा करना थोड़ा जल्दबाजी लगता है।
मंगल पर रहस्य कम नहीं होते। पहले जल, अब रेंगता साया। क्या अगला discovery खुलासा जीवन होगा?
झुरोंग रोवर के डेटा ने जो महासागर का नक्शा दिखाया, वह भी crucial अहम है। यह सब जुड़कर एक तस्वीर बना रहा है।
ESA की तस्वीरें बहुत स्पष्ट हैं। लेकिन क्या हम वाकई केवल images तस्वीरों पर भरोसा कर सकते हैं?