हीलिंग हॉस्पिटल चंडीगढ़ ने पार्किंसंस रोग के लिए एडेप्टिव डीबीएस की शुरुआत की
हीलिंग हॉस्पिटल चंडीगढ़ ने पार्किंसंस रोग के उपचार में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एडेप्टिव डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन (एडीबीएस) की शुरुआत की है। यह तकनीक उत्तर भारत के मरीजों के लिए एक बड़ी उम्मीद के रूप में सामने आई है, क्योंकि यह पारंपरिक उपचारों से कहीं आगे का व्यक्तिगत और real-time दृष्टिकोण पेश करती है। इसके साथ ही यह अस्पताल ट्राईसिटी का पहला और देश के चुनिंदा केंद्रों में से एक बन गया है जहां यह उन्नत उपचार उपलब्ध है।
एडेप्टिव डीबीएस एक छोटे उपकरण के जरिए मस्तिष्क के विशिष्ट क्षेत्रों को controlled विद्युत संकेत भेजता है। इसकी खास बात यह है कि यह मस्तिष्क की गतिविधियों को लगातार monitor करता है और अपने आप स्टिम्युलेशन के स्तर में बदलाव करता है। इससे मरीजों को दिनभर होने वाले उतार-चढ़ाव में स्थिरता मिलती है, जो पार्किंसंस के लक्षणों में बहुत बड़ी चुनौती होती है।
डॉ. जे.पी. सिंघवी, न्यूरोलॉजिस्ट, ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य daily life में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि पहले मरीज दवाओं के घटते-बढ़ते प्रभाव से जूझते थे, लेकिन अब यह तकनीक एक stable प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। डॉ. जसप्रीत रंधावा, न्यूरोसर्जन, ने जोड़ा कि यह उपचार मस्तिष्क की गतिविधि पर responsive थेरेपी प्रदान करता है, जो पहले संभव नहीं था।
मैनेजिंग पार्टनर रछपाल सिंह बुट्टर ने कहा कि यह कदम उत्तर भारत में advanced care की पहुंच को बढ़ाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मरीजों को अब दूर-दराज की यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होगी। एडीबीएस के माध्यम से चुनिंदा मरीजों में 70–80% तक लाभ देखा गया है, और एडेप्टिव संस्करण इसे और precise बनाता है।
मरीजों को आमतौर पर 2–4 दिन अस्पताल में रहना होता है और 1–2 हफ्तों में वे अपनी routine activities पर वापस आ जाते हैं। बाद में उपकरण को समय के साथ optimize किया जाता है। यह तकनीक मेडट्रॉनिक द्वारा विकसित की गई है, जो चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता है।
हीलिंग हॉस्पिटल चंडीगढ़ अब मेदांता और अपोलो हॉस्पिटल्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ इस तकनीक के प्रदाता के रूप में जुड़ गया है। यह उत्तर भारत में एक trusted न्यूरोसाइंस सेंटर के तौर पर उभर रहा है, जहां मरीज गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा की उम्मीद कर सकते हैं। पार्किंसंस जैसी बढ़ती न्यूरोलॉजिकल बीमारी के खिलाफ यह कदम समय के अनुरूप और जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है।
अगर यह तकनीक सच में उतार-चढ़ाव कम कर दे, तो रोजमर्रा की जिंदगी बहुत आसान हो जाएगी। मेरे चाचा को पार्किंसंस है। daily life दिनचर्या में स्थिरता बहुत बड़ी बात होगी।
खुशी है कि उत्तर भारत में ऐसी advanced उन्नत सुविधा आ रही है। लेकिन कीमत कितनी होगी? यह जानना जरूरी है।
दिल्ली या मुंबई जाने की जरूरत नहीं — यही बड़ी राहत है। लेकिन क्या insurance बीमा इसे कवर करेगा? बहुत से लोग इस पर निर्भर करते हैं।
एडेप्टिव डीबीएस का नाम पहले सुना था। ये लोग असल में कटिंग-एज तकनीक ला रहे हैं। बहुत बढ़िया।
यह तो बहुत अच्छी खबर है, लेकिन क्या यह हर मरीज के लिए उपयुक्त है? सभी को access पहुंच नहीं मिल पाएगी, इसका खतरा है।
मेडट्रॉनिक का नाम देखकर भरोसा बढ़ गया। वे global वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद हैं। उम्मीद है यहां भी स्तर बरकरार रहेगा।