नरेन का जादू: 200 विकेट के साथ इतिहास में नाम दर्ज
एक ऐसा नाम जो आईपीएल के इतिहास में हमेशा चमकता रहेगा — इतिहास रचने वाले विदेशी खिलाड़ियों में सुनील नरेन अब अकेले हैं। 3 मई को हैदराबाद में खेले गए मैच में कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए उन्होंने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ performance दिखाया जो सिर्फ एक गेंदबाजी का नहीं, बल्कि एक करियर के शिखर का प्रतीक था। विकेट लेने की लय में चलते हुए नरेन ने आईपीएल में 200 विकेट पूरे कर लिए — यह कारनामा करने वाले वे पहले foreign खिलाड़ी बन गए। इसके साथ ही वे लीग के इतिहास में कुल तीन खिलाड़ियों के क्लब में शामिल हो गए, जहां मात्र युजवेंद्र चहल और भुवनेश्वर कुमार जैसे नाम थे।
आज उन्होंने सिर्फ दो over नहीं डाले, बल्कि एक मैच में ईशान किशन और सलिल अरोड़ा को पवेलियन भेजकर 2 विकेट लिए। ये विकेट उनके कुल 201 विकेट के आंकड़े तक पहुंचाने वाले थे। करियर के 197 मैचों में ये उपलब्धि उनके स्थायित्व को दर्शाती है। एक ऐसा खिलाड़ी जो 2012 से केकेआर के लिए लगातार खेल रहा है, 37 साल की उम्र में भी spin के जादू से बल्लेबाजों को उलझा रहा है। उनका औसत 6.79 का है — जो लीग के सबसे लंबे समय तक चलने वाले गेंदबाजों में सबसे बेहतरीन है।
लेकिन नरेन सिर्फ एक गेंदबाज नहीं हैं। batting में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। आईपीएल में उनके नाम एक शतक और सात अर्धशतक दर्ज हैं। कुल 1820 रन, स्ट्राइक रेट 165.3 — जो निचले क्रम में बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ियों के लिए एक तूफानी आंकड़ा है। कई सीजन में तो वे टॉप ऑर्डर में भी उतरे, और उसी अंदाज में बल्लेबाजी की जो उनके खेल के बारे में बोलती है — वह एक ऑल-राउंडर हैं, न कि सिर्फ एक गेंदबाज।
मैच के नतीजे की बात करें, तो कोलकाता ने 166 रन के लक्ष्य को 18.2 ओवर में ही पार कर लिया और सनराइजर्स को 7 विकेट से defeat दिया। लेकिन आज का दिन सिर्फ जीत का नहीं था — यह एक खिलाड़ी के समर्पण, विरासत, और लगातार खेलने की जिद का था। tournament में सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों की सूची में वे अब तीसरे स्थान पर हैं, चहल और भुवी के बाद। पीछे छोड़ दिया पीयूष चावला, बुमराह और ड्वेन ब्रावो जैसे नाम। यह एक ऐसा उपलब्धि है जो आंकड़ों में दर्ज है, लेकिन भावनाओं में भी गहराई से बसी है।
200 विकेट आईपीएल में — ये कोई छोटी बात नहीं है। नरेन ने लगातार खेलकर इतिहास रचा। लगातारता ही इसकी कुंजी थी।
क्या आप जानते हैं कि उन्होंने सिर्फ केकेआर के लिए ही खेला है? ये भी एक बड़ी बात है। loyalty वफादारी आजकल कम देखने को मिलती है।
स्पिन तो सब फेंकते हैं, लेकिन नरेन की गेंदों में कुछ अजीब सा ट्विस्ट होता है।
अगर वो बल्लेबाजी में भी इतना योगदान देते हैं, तो क्या उन्हें finisher फिनिशर की भूमिका में देखा जा सकता है?
चहल और भुवी के बाद तीसरे स्थान पर पहुंचना — ये बताता है कि विदेशी खिलाड़ी भी लीग की धड़कन बन सकते हैं।
मुझे लगता है कि उनकी बल्लेबाजी को कम अंदाजा किया जाता है। 1820 रन और स्ट्राइक रेट 165 — ये कोई मामूली आंकड़े नहीं हैं।
क्या अब वो चहल के रिकॉर्ड तक पहुंच सकते हैं? 228 विकेट — ये भी एक मील का पत्थर है।
37 साल की उम्र में भी प्रदर्शन — ये दिखाता है कि जब दिल में जुनून हो, तो उम्र सिर्फ एक संख्या है।