ईरान के परिष्कृत यूरेनियम मामले में सहायता दे सकता है रूस, विदेश मंत्री लावरोव ने कही ये बात

रूस ने ईरान के enriched uranium मामले में अंतरराष्ट्रीय tension कम करने के लिए अपनी support देने की पेशकश की है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने चीन की यात्रा के दौरान एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि मामले में diplomatic role निभाई जा सकती है।

ईरान ने अब तक 60 प्रतिशत तक यूरेनियम का enrichment कर लिया है, जो एक संवेदनशील स्तर माना जाता है। लावरोव ने कहा कि रूस technical assistance के जरिए इसे fuel के रूप में उपयोग योग्य बना सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय consensus के तहत यह सामग्री रूस ले जाई जा सकती है या शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए उपयोग की जा सकती है।

रूस 2015 में ईरान के साथ हुए बहुपक्षीय परमाणु समझौते, जिसे JCPOA के नाम से जाना जाता है, का एक key participant था। हालांकि, अमेरिका ने 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इस समझौते से withdrawal कर ली थी और ईरान पर कठोर sanctions लगा दिए थे, जिससे समझौते पर संकट आ गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि रूस की ओर से यह पेशकश न केवल geopolitical influence बढ़ाने की रणनीति है, बल्कि वैश्विक nuclear concerns के बीच एक संभावित mediation का भी संकेत देती है। ईरान और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत bilateral ties रहे हैं, जो इस प्रस्ताव को और विश्वसनीय बनाते हैं।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • सुधीर

    अगर रूस वाकई में तकनीकी सहायता दे सकता है, तो यह nuclear risk कम करने का एक तरीका हो सकता है।

  • प्रियंका

    लेकिन क्या अमेरिका और यूरोप रूस पर भरोसा करेंगे? खासकर जब वह खुद sanctions के दायरे में है।

  • राकेश

    ये सब दिखावा है। रूस को तो सिर्फ global influence बढ़ाने का मौका मिल रहा है।

  • मीना

    ईरान के पास 60% तक enriched uranium होना खतरनाक संकेत है, चाहे वह शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए क्यों न हो।

  • अर्जुन

    2015 का समझौता टूटा तो अमेरिका ने, लेकिन अब सभी देशों को diplomatic solution ढूंढने में लगना चाहिए।

  • लक्ष्मी

    अगर रूस ईंधन बनाने में मदद करे, तो कम से कम peaceful use की दिशा में कदम तो है।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

[email protected]