ईरान अमेरिका के राष्ट्रपति आमने-सामने क्यों नहीं आते, जानें कब-कब टूटी डील
ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपति आमने-सामने क्यों नहीं आते? यह सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है, क्योंकि दोनों देशों के बीच nuclear talks फिर से बिना किसी agreement के खत्म हो गई है। वर्तमान में उनके रिश्ते इतने तनावपूर्ण हैं कि direct contact भी लगभग नामुमकिन सा लगता है। यह कोई एक घटना नहीं, बल्कि दशकों पुराने mistrust का नतीजा है, जिसने दोनों देशों को लगातार दूर रखा है।
संबंधों में गिरावट की शुरुआत 1979 की क्रांति के बाद हुई, जब ईरान ने अमेरिकी embassy में कर्मचारियों को बंधक बना लिया था। तब से लेकर आज तक, sanctions , nuclear program , और आपसी accusations ने बातचीत के रास्ते बंद कर दिए। अमेरिका ने 2018 में JCPOA, यानी nuclear deal से अचानक withdrawal चुना, जिससे ईरान को आर्थिक झटका लगा और वह और कठोर posture में चला गया।
फिर भी, कई बार प्रयास हुए। 2015 में JCPOA के तहत ईरान ने अपने enrichment को सीमित करने का commitment किया था, जिसके बदले प्रतिबंध हटाए गए। लेकिन अमेरिका के पीछे हटने के बाद, ईरान ने धीरे-धीरे फिर से अपना कार्यक्रम बढ़ा दिया। अब वह ऐसे स्तर तक पहुँच चुका है जहाँ एक breakthrough के करीब है, जिससे अंतरराष्ट्रीय concern बढ़ गई है।
इस बीच, दोनों देशों के नेतृत्व के बीच कोई औपचारिक summit नहीं हुई। कोई राष्ट्रपति दूसरे के देश में नहीं गया, न ही कोई direct meeting हुई। बातचीत के लिए तीसरे देशों या अंतरराष्ट्रीय mediation पर निर्भरता बनी हुई है। यह न केवल राजनयिक isolation को दिखाता है, बल्कि यह भी कि विश्वास बहाली का रास्ता अभी लंबा है।
आज, जब दुनिया ऊर्जा संकट और सैन्य तनाव से जूझ रही है, ईरान-अमेरिका संबंध फिर से केंद्र में हैं। क्या कोई नया diplomatic effort संभव है? या दोनों तरफ के hardliners नए रास्ते बंद कर देंगे? यह सवाल अभी भी खुला है, और इसका global impact बहुत गहरा हो सकता है।
हर बार बात बनते-बनते टूट जाती है। क्या सच में compromise समझौता हो सकता है, या दोनों तरफ के नेता सिर्फ दिखावे के लिए बात कर रहे हैं?
अमेरिका के sanctions प्रतिबंध ईरानी जनता पर सबसे ज्यादा भारी पड़ रहे हैं। यह pressure दबाव लोगों के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है।
ईरान का nuclear program परमाणु कार्यक्रम सिर्फ ऊर्जा के लिए है या फिर कुछ और? इसके बारे में स्पष्टता की कमी है।
अगर दोनों तरफ के राष्ट्रपति आमने-सामने नहीं बैठ सकते, तो फिर trust भरोसा कैसे बनेगा? face-to-face आमने-सामने मुलाकात जरूरी है।
अमेरिका जहाँ withdrawal बाहर निकलना चुनता है, वहाँ ईरान retaliation प्रतिशोध के मूड में आ जाता है। यह चक्र कब तक चलेगा?
दुनिया को चाहिए कि यह conflict संघर्ष खत्म हो। एक नई initiative पहल की जरूरत है, वरना तनाव बढ़ता रहेगा।