हिमाचल राजनीति: कौल सिंह ठाकुर ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए, बोले- 'सुक्खू सरकार में CM के आदेश भी नहीं मानते अफसर'
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर tension का माहौल बन गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने अपनी ही सरकार पर गंभीर accusation लगाए हैं, जिसमें वे यह दावा कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आदेशों को भी प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा। बिजनी में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह तक कह दिया कि सरकार में work नहीं हो रहा। यह बयान उन लोगों के लिए बड़ी warning के रूप में सामने आया है जो प्रदेश के शासन में सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
कौल सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की शासन प्रणाली का जिक्र करते हुए तुलना की। उन्होंने बताया कि जब वीरभद्र सिंह किसी फाइल पर 'अप्रूव्ड' लिखते थे, तो तुरंत आदेश जारी हो जाते थे। लेकिन आज, सुक्खू सरकार में मुख्यमंत्री के approval देने के बावजूद फाइलें तीन महीने तक ठहरी रहती हैं। उन्होंने इसे 'अधिकारियों की मनमानी' करार दिया और कहा कि यह व्यवस्था public trust पर सीधा impact डाल रही है।
एक ठोस उदाहरण देते हुए पूर्व मंत्री ने द्रंग विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने द्रंग के स्कूलों में प्राचार्यों के पदों के लिए नाम सुझाए, लेकिन एक को काजा के किब्बर और दूसरे को पन्जाई भेज दिया गया। यह तबादला उनकी recommendation के खिलाफ था। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद अधिकारियों के स्तर पर नोट disappear कैसे हो जाते हैं। यह जानकारी उन्होंने सीधे सुक्खू को भी दी, लेकिन अब तक कोई response नहीं मिली।
इस लेटलतीफी और अनियमित transfer की वजह से द्रंग के कई स्कूलों में अभी भी शिक्षकों के पद रिक्त हैं। जिन शिक्षकों को पदोन्नत किया गया, उन्हें क्षेत्र से बाहर भेज दिया गया। कौल सिंह ने कहा कि आम लोग जब उनके पास काम के लिए आते हैं, तो वे केवल एक recommendation letter देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझते हैं।
इस तरह के आरोपों ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर सीधा pressure बनाया है। कांग्रेस के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। कौल सिंह के बेबाक statement का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे प्रदेश कांग्रेस के भीतर की खींचतान सामने आ रही है। यह घटना सिर्फ एक विभागीय लेटलतीफी नहीं, बल्कि सरकार के functioning पर एक बड़ा सवाल है।
अगर CM के आदेशों को भी अधिकारी नजरअंदाज कर सकते हैं, तो आम आदमी का क्या होगा? यह तो पूरी व्यवस्था की failure विफलता है।
कौल सिंह ने सच बोला। वीरभद्र सिंह के जमाने में काम तुरंत होता था। अब तो delay देरी ही नियम बन गई है।
द्रंग के स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली रहना छात्रों के भविष्य पर risk जोखिम है। यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
ये लड़ाई केवल एक नियुक्ति की नहीं है। यहां power ताकत के स्रोत पर संघर्ष चल रहा है — CM या ब्यूरोक्रेसी?
क्या कौल सिंह वाकई में चिंतित हैं या बस अगले चुनाव के लिए मुद्दा बना रहे हैं? इस तरह के public drama जनतक नाटक तो हर जगह होते हैं।
अगर ये बात सच है, तो CM को तुरंत action कार्रवाई करनी चाहिए। नहीं तो भरोसा और खो जाएगा।