नसीर अहमद को हटाए जाने पर शिवकुमार का संदेश: पार्टी अनुशासन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण
बेंगलुरु में एक तूफानी राजनीतिक decision ने कांग्रेस के आंतरिक माहौल को हिला दिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी और राजनीतिक सचिव नसीर अहमद को अचानक पद से हटा दिया गया है। इस move के पीछे पार्टी के हित में अनुशासन बहाल करने की कोशिश दिख रही है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि पार्टी अनुशासन most important है।
शिवकुमार ने सदाशिवनगर स्थित अपने आवास पर media के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्रोतों से report जुटाकर यह action की है। उन पर आरोप है कि दावनगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव के दौरान नसीर अहमद ने पार्टी के उम्मीदवार समर्थ शमनूर के खिलाफ campaign चलाया। उन्हें पार्टी की ओर से बागी उम्मीदवार को चुनाव से हटाने की responsibility दी गई थी, जिसे वह failed रहे।
जब पूछा गया कि क्या यह कार्रवाई अन्य anti-party तत्वों के लिए संदेश है, तो शिवकुमार ने कहा कि हर पार्टी में discipline महत्वपूर्ण होता है। हमने उम्मीदवार चयन में सभी नेताओं को involve किया था, और अब कोई भी व्यक्तिगत interest पार्टी के हित से ऊपर नहीं होना चाहिए।
इस बीच, शिवकुमार ने विधायकों के साथ नियमित बैठकों की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनावों पर चर्चा करना उनकी duty है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधायकों का दिल्ली जाकर मंत्री पद की मांग करना not wrong है, लेकिन वे पार्टी के भीतर unity बनाए रखें। वे उन्हें सिर्फ अनुशासन बनाए रखने और मीडिया के सामने cautious रहने की सलाह दे रहे हैं।
नसीर अहमद पर लगे आरोप गंभीर हैं, और मुख्यमंत्री द्वारा त्वरित response ने संकेत दिया है कि कांग्रेस अब आंतरिक conflict को नजरअंदाज नहीं करेगी। यह फैसला पार्टी के public image और आगामी चुनावी strategy पर भी असर डाल सकता है। शिवकुमार के बयान से साफ है कि अब अनुशासन की line कड़ी हो गई है।
अच्छा किया। discipline अनुशासन नहीं तो पार्टी कैसे चलेगी? एक बार छूट गई तो सब अपना-अपना रास्ता ले लेंगे।
इतने करीबी को हटाना आसान नहीं होगा। क्या यह political cost राजनीतिक लागत नहीं आएगी?
अब तो हर कोई cautious सावधान रहेगा। मीडिया के सामने बोलने से पहले सोचेगा।
लेकिन क्या यह सिर्फ एक symbolic move प्रतीकात्मक कदम है? क्या असली बागी तो अभी भी बाहर हैं?
दावनगेरे में जो हुआ, उसकी report रिपोर्ट तो आनी चाहिए। बिना जांच के फैसला कैसे?
अगले चुनाव में public trust जन भरोसा बहाल करने के लिए ऐसे strong action मजबूत कदम जरूरी हैं।