हिमाचल कांग्रेस में घमासान: सुक्खू के मंत्रियों पर पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर का बयान, बताया-किसने बदली थी उनकी दी लिस्ट?
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में तनाव एक बार फिर उफान पर है। पूर्व मंत्री senior leader कौल सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कार्यकाल में transfer list में हेराफेरी का serious allegation लगाया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी ओर से दी गई शिक्षकों की तैनाती की लिस्ट को changed , जिसमें कुछ ऐसे लोग शामिल हैं जो पहले ही बंद स्कूलों में नियुक्त थे।
ठाकुर ने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे कुछ अधिकारी पिछले मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के समय से ही वहीं हैं और उन्होंने उनकी लिस्ट में interference किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा उन्होंने पार्टी की आंतरिक बैठक में उठाया था, जहां यह स्पष्ट किया गया कि party workers संगठन की रीढ़ हैं और उनकी अनदेखी करने से public trust कमजोर होता है।
इस बीच, संगठनात्मक स्तर पर भी देरी चिंता का विषय है। कई जिलों में जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की appointments लंबित हैं, जिससे पंचायत चुनावों की तैयारियों पर negative impact पड़ सकता है। ठाकुर ने इन चुनावों को कांग्रेस के लिए semi-final बताया और कहा कि पार्टी इसे मजबूती से लड़ेगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार और संगठन के बीच पूर्ण coordination है और कोई असहमति नहीं है। उन्होंने पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि सभी मुद्दों पर वहां चर्चा की जाएगी। फिर भी, पार्टी के भीतर बढ़ता dissent और नेताओं के बीच तालमेल की कमी की चर्चा लगातार बढ़ रही है।
यह आंतरिक तनाव केवल संगठनात्मक नहीं है, बल्कि governance की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करता है। जब वरिष्ठ नेता अपनी ही सरकार की नीतियों पर doubt जताते हैं, तो यह संकेत है कि internal trust डगमगा रहा है। अगर इसे समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो आगामी चुनावी मैदान में इसका cost भुगतना पड़ सकता है।
सरकार में बैठे लोगों को यह समझना होगा कि party workers पार्टी कार्यकर्ता की अनदेखी करने से जनआधार कमजोर होता है।
अगर मुख्यमंत्री के दफ्तर में ही लिस्ट बदली जा सकती है, तो accountability जवाबदेही कहाँ है? यह तो पूरी प्रक्रिया को झटका है।
सेमीफाइनल बोलकर ठाकुर ने सही कहा। लेकिन अगर internal coordination आंतरिक समन्वय नहीं होगा, तो फाइनल में पहुंचना मुश्किल होगा।
हर बार चुनाव से पहले यही होता है — dissent मतभेद बाहर आते हैं। क्या हाईकमान कुछ करेगा?
शिक्षा विभाग में जो हो रहा है, उस पर तुरंत action कार्रवाई होनी चाहिए। बच्चों का भविष्य दांव पर है।
क्या सुक्खू वाकई नियंत्रण में हैं? या फिर उनके office दफ्तर में कोई और फैसले ले रहा है?