सुपर ओवर का बुरा सपना: पूरन को भेजकर LSG ने खो दी जंग?
आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स की कहानी नाटकीय मोड़ पर पहुंच गई है। match के अंतिम पल में सुपर ओवर तक जाने के बाद भी टीम ने खिताबी दौड़ में खुद को संभाल नहीं पाई। पूर्व भारतीय विकेटकीपर दीप दासगुप्ता ने उस decision को टीम की सबसे बड़ी गलती बताया जब खराब form में चल रहे निकोलस पूरन को मिचेल मार्श से पहले सुपर ओवर में भेजा गया। यह नहीं कि पूरन नए थे या अनुभवहीन — बल्कि यह कि उनकी performance के साथ टीम ने जोखिम ले लिया, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।
दासगुप्ता ने जियोस्टार के साथ बातचीत में कहा कि लखनऊ को इस मैच में जीत दर्ज करनी चाहिए थी। pitch चुनौतीपूर्ण थी, हां, लेकिन 156 रन का target ऐसा नहीं था जिसे अन्य टीमें आराम से नहीं पार कर पातीं। chase करने में असफलता ने न सिर्फ अंक तालिका को प्रभावित किया, बल्कि टीम के मनोबल पर भी सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि टी20 क्रिकेट में लगातार करीबी defeat सीजन के गणित को बिगाड़ सकती है।
मैच के दौरान लखनऊ की शुरुआत खराब रही। मार्श महज 2 रन बनाकर आउट हो गए। एडेन मार्करम और ऋषभ पंत ने 55 गेंदों में 57 रन जोड़े, लेकिन उसके बाद विकेट लगातार गिरते रहे। पूरन सिर्फ 9 रन बना पाए। partnership बनाने में नाकामी, dismissal , और अंत तक पहुंचने की लड़ाई — सब कुछ जुड़कर दिख रहा था। हिम्मत सिंह ने 19 रन बनाए, जबकि शमी ने आखिरी गेंद पर छक्का मारकर मैच को सुपर ओवर में धकेला। यह लम्हा नाटकीयता का था, लेकिन निर्णयों का दामन भारी था।
सुपर ओवर में पूरन को पहले भेजे जाने का फैसला विवादित साबित हुआ। वह सनील नरेन की पहली गेंद पर ही क्लीन बोल्ड हो गए। मार्करम भी तीसरी गेंद पर आउट हो गए। लखनऊ सिर्फ 1 रन बना पाई। bowler नरेन के खिलाफ उनकी खराब फॉर्म और सांख्यिकी को नजरअंदाज करना टीम की रणनीति में flaw दिखाता है। दूसरी ओर, रिंकू सिंह ने पहली गेंद पर चौका लगाकर केकेआर को जीत दिला दी। celebration के बीच, लखनऊ के कोचिंग स्टाफ के चेहरों पर निराशा थी।
दासगुप्ता के अनुसार, सुपर ओवर में मार्श, हिम्मत और मार्करम को तरजीह दी जानी चाहिए थी। ये वे batsman थे जिन्होंने सीजन में लगातार योगदान दिया था। selection में भावनाओं की जगह तर्क की कमी दिखी। एक छोटा रणनीतिक कदम टीम के प्लेऑफ के सपनों को धूल में मिला सकता है। अब सवाल यह नहीं कि वे हारे कैसे, बल्कि यह है कि क्या वे इस मानसिक झटके से उबर पाएंगे।
पूरन को सुपर ओवर में भेजना था जैसे आग में घी डालना। उनकी form फॉर्म तो पहले से ही खराब थी।
मार्श को पीछे रखना गलत था। वो इस सीजन के टॉप स्कोरर हैं। क्यों नहीं उन पर भरोसा किया?
शमी का आखिरी छक्का दिल जीत गया, लेकिन कप्तान का decision फैसला नाकाम रहा।
कभी-कभी pressure दबाव में गलत बल्लेबाजी क्रम सब कुछ बिगाड़ देता है।
हार गए, लेकिन जूझने का जज्बा दिल छू गया।
नरेन के खिलाफ पूरन का record रिकॉर्ड खराब है। क्या टीम ने आंकड़े नहीं देखे?
लखनऊ के फैंस का दिल टूट गया। अगले मैच में सुधार की उम्मीद है।
सुपर ओवर में सिर्फ 1 रन? ये किसी बुरे सपने जैसा था।