उत्तर प्रदेश राजनीति: सपा में शामिल हुए बसपा नेता को अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, कहा- अब से आप...
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जब बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं ने the party में शामिल होने का ऐलान किया। 21 अप्रैल, 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के मुख्यालय पर आयोजित press conference में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बसपा से आए नेता एमएच खान को तुरंत spokesperson की जिम्मेदारी सौंप दी। अखिलेश ने कहा, "अब आप टीवी पर हमारा पक्ष रखेंगे", जो संकेत देता है कि पार्टी the opposition की आवाज़ को और मजबूत करना चाहती है।
इस बीच, अखिलेश यादव ने भाजपा की पदयात्रा पर तीखी criticism की। उन्होंने कहा कि यह अजीब है कि सरकार अपने ही कानून के खिलाफ protests कर रही है। उन्होंने गर्मी में घूमते भाजपाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है मानो वे practice कर रहे हों कि कैसे विपक्ष में बैठा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब सत्ता में रहते हुए कोई सरकार विपक्ष की तरह व्यवहार कर रही है।
अखिलेश ने महिला आरक्षण पर भी स्पष्ट position रखी। उन्होंने कहा कि सपा हमेशा से इसके पक्ष में रही है, लेकिन बीजपा इसे रोकने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनगणना ठीक तरीके से नहीं होगी, तो आरक्षण कैसे लागू होगा। उन्होंने बीजपा पर आरोप लगाया कि वह propaganda में लगी है और संवैधानिक पदों पर बैठे लोग भी इसमें शामिल हैं।
कन्नौज के सांसद ने पीडीए परिवार — पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक — को आगे लाते हुए कहा कि यही समूह Gen Z का true प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने दावा किया कि यही समूह अगले चुनाव में सत्ताधारी दल को defeat जा रहा है। साथ ही, उन्होंने यूपी विधानसभा के विशेष सत्र का विरोध करने की घोषणा की और कहा कि पार्टी सदन के भीतर भी अपना stance मजबूती से रखेगी।
अखिलेश ने प्रधानमंत्री मोदी के एक बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि वे हमेशा अखिलेश की मदद करते हैं। इस पर सपा चीफ ने तंज किया और कहा, "संसद में मेरा माइक बंद हो गया था, मैंने पूछा क्या मदद की है?" यह बातचीत public trust पर उठाए गए सवाल को और तीखा करती है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर, यह साफ है कि राजनीतिक temperature तेजी से बढ़ रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही प्रवक्ता बना दिया? यह तो बहुत fast तेज फैसला था। क्या यह सिर्फ दिखावा नहीं?
अखिलेश कहते हैं बीजपा विपक्ष की तरह व्यवहार कर रही है, लेकिन 2017 में तो सपा भी सत्ता में रहते हुए ऐसा ही कर रही थी। दोनों में क्या फर्क? hypocrisy आडंबर बहुत है।
Gen Z का भविष्य इन बड़ों के हाथों में है, लेकिन क्या वाकई वे हमारी बात सुनेंगे? या बस rhetoric बयानबाजी में फंसे रहेंगे?
गर्मी में पैदल यात्रा पर टिप्पणी करना बेमानी है। लोगों को तो basic facilities मूलभूत सुविधाएं चाहिए, न कि तंज।
जब संवैधानिक पदों पर बैठे लोग प्रचार में लगे हों, तो लोकतंत्र की health सेहत पर सवाल उठना लाजिमी है।
चाय की दुकान बंद कराने का मुद्दा छोटा लगे, लेकिन छोटे व्यापारियों के लिए यह survival अस्तित्व का सवाल है। अच्छी बात है कि इस पर बात हुई।
पीडीए परिवार की बात कर रहे हैं, लेकिन जनगणना न होने से आंकड़े कैसे आएंगे? data आंकड़े तो बिना जनगणना के अधूरे हैं।
महिला आरक्षण पर बात सही है, लेकिन क्या यह वाकई लागू होगा या बस election promise चुनावी वादा रहेगा?